रेवाड़ी। शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में बरसात के मौसम को मद्देनजर रखते हुए पानी की निकासी के पर्याप्त इंतजाम कर दिए गए हैं। नगर परिषद, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग तथा सिंचाई विभाग की ओर से 100 से अधिक पंप स्थापित किए गए हैं। फिर भी जलभराव से राहत नहीं मिल रही है। प्रशासन का दावा है कि पानी की निर्बाध निकासी के लिए ड्रेन, नालों व सीवर लाइनों की सफाई करवा दी गई है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर व मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के साथ हुई वीडियो कांफ्रेंस में डीसी अभिषेक मीणा ने व्यवस्था को लेकर जानकारी दी। डीसी ने बताया कि शहर में जलभराव के प्रमुख स्थान जैसे ब्रास मार्केट, सिविल अस्पताल, नई अनाज मंडी रोड, सेक्टर तीन, वार्ड एक, हनुमान मंदिर, शिव चौक आदि पर पानी निकासी के लिए पंप स्थापित किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि रेवाड़ी के अलावा कोसली, बावल तथा धारूहेड़ा कस्बा में भी पानी निकासी के लिए स्थाई तौर पर 12 व 11 मूवेबल पंप लगाए गए हैं। शहरी क्षेत्र में ड्रेनेज सिस्टम की सफाई करवाई गई है। अब बारिश आने के बाद दो से तीन घंटे की अवधि में पानी निकाल दिया जाता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई विभाग ने 52 मूवेबल तथा 14 स्थानों पर बरसाती पानी की निकासी के लिए स्थायी तौर पर पंप स्थापित किए गए हैं। जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए प्रशासन की ओर से सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं।
जन शिकायतों का समाधान किया जा रहा:
डीसी ने बताया कि विभिन्न विभागों से संबंधित जन शिकायतों का समाधान किया जा रहा है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि समाधान शिविर, जनसंवाद या समाधान प्रकोष्ठ की एक भी शिकायत अधिक समय तक लंबित ना रहे। बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि उपायुक्त स्वयं मौके पर जाकर पानी निकासी के लिए लगाए गए पंपों की वर्किंग का निरीक्षण करें। उन्होंने कहा कि अनट्रीटेड वाटर (अनुपचारित पानी), नदी या बरसाती पानी ड्रेन में ना डाला जाए।
इन मुद्दों पर भी हुई चर्चा :
इस बैठक में समाधान शिविर, साइबर क्राइम के दोषी व्यक्ति की संपत्ति को जब्त करने के लिए बनाए गए नए एक्ट, क्रिड की कार्यप्रणाली, पंचायती भूमि पर वर्ष 2004 से पहले काबिज लोगों को स्वामित्व प्रदान करने आदि के बारे में विचार-विमर्श किया गया।