जिलेभर के तीन दर्जन से अधिक राजकीय प्राथमिक स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। ये शिक्षक अध्यापन के साथ लिपिक का कार्य भी कर रहे हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इन स्कूलों के अध्यापक जिस दिन छुट्टी पर होते हैं, उस दिन इन स्कूलों को मजबूरन बंद करना पड़ता है। इससे बच्चों के अभिभावकों में शिक्षा विभाग के खिलाफ रोष है। जिलेभर में 403 राजकीय प्राथमिक स्कूल हैं। अधिकांश स्कूलों में शिक्षकों एवं संसाधनों की कमी है। वहीं कई स्कूल तो एक ही शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है।
बावल खंड के 19 स्कूल एक शिक्षक के भरोसे
बावल खंड में 108, रेवाड़ी खंड में 114, जाटूसाना में 67, नाहड़ में 52 व खोल में 63 स्कूल हैं। इनमें तीन सौ से अधिक अध्यापकों के पद रिक्त है। इनमें अकेले बावल खंड के 19 स्कूलों में केवल एक शिक्षक हैं।
खेड़ी डालूसिंह व तिहाड़ा में 56 बच्चों का भविष्य उधार के शिक्षकों के हाथ में
बावल खंड के गांव खेड़ी डालूसिंह व तिहाड़ा स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में क्रमश: 22 व 34 बच्चों का भविष्य उधार के शिक्षकों के हाथों में है। इन स्कूलों में लंबे समय नियमित अध्यापकों केे पद रिक्त हैं। ऐसे में विभाग की ओर से यहां टेम्परेरी व्यवस्था कर अध्यापकों को भेजा गया है। सरकारी नियम के अनुसार नियमानुसार 20 के लगभग बच्चों की संख्या पर संबंधित स्कूल में एक शिक्षक की नियुक्ति की जाती है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई पर तो कुप्रभाव पड़ ही रहा है। इन प्राथमिक स्कूल में एक भी अध्यापक नहीं हैं। ऐसे में मात्र सरकार का यह नारा दिखावा ही साबित हो रहा है।
इन स्कूलों में मात्र एक अध्यापक
आसरा का माजरा के प्राथमिक स्कूल में 33 बच्चे, बधराना के स्कूल में 52, भगवानपुर के स्कूल में 24, बिदावास के स्कूल में 43, ढाणी अहीर के स्कूल में 20, ढाणी धारण के स्कूल में 4, झाबुआ के स्कूल में 62, खरखड़ी के स्कूल में 20, खेड़ी डालूसिंह के स्कूल में 22, मोतला खेड़ी के स्कूल में 10, ओढी के स्कूल में 31, पातुहेड़ा के स्कूल में 80, रायपुर के स्कूल में 34, राजगढ़ के ब्वायज स्कूल में 28, राजगढ़ के गर्ल्स स्कूल में 34, रामसिंहपुरा के स्कूल में आठ, रानौली के स्कूल में 15, साबन के स्कूल में 35 व तिहाड़ा के स्कूल में 34 विद्यार्थी है। इनको पढ़ाने के लिए उक्त विद्यालयों में मात्र एक ही अध्यापक हैं।
डेपुटेशन के बाद भी नहीं किया ज्वाइन
करीब एक सप्ताह पूर्व गांव खरखड़ी में स्कूल के शिक्षक व मिड-डे मील हेल्पर के बीच विवाद हुआ था। जो पुलिस स्टेशन भी पहुंच गया था। ग्रामीणों के हस्तक्षेप के बाद समझौता करा दिया गया। विभाग ने इसे शांत करने के लिए मोहम्मदपुर गांव के स्कूल से एक अध्यापकों को डेपुटेशन पर भेजा था। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते अध्यापक ने अभी तक खरखड़ी स्कूल को ज्वाइन नहीं किया है।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, रेवाड़ी सुरेश कुमार गोरिया ने कहा कि जिले के प्राथमिक स्कूलों में पहले की तुलना में काफी सुधार हुआ है। जिन स्कूलों में केवल एक ही शिक्षक हैं, वहां बच्चों की संख्या भी उसी अनुरूप है। वहीं रिक्त पदों को लेकर आला अधिकारियों को सूचना दी हुई है।