पानी में तबाह हुई बाजरे की फसल को दिखाता किसान।
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खोल। सोमवार को क्षेत्र में मूसलाधार बारिश ने कई किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया। किसी की पूरी फसल चौपट हो गई तो किसी की फसल में पानी भर गया। किसानों का कहना है कि ऐसी बारिश 20 साल पूर्व हुई थी।
सोमवार को हुई तेज बारिश के बीच हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा था। जैनाबाद से सीहा सड़क मार्ग की तरफ सीहा के पहाड़ से नदी की तरह पानी आया और बाजरा व कपास की फसल को मिट्टी से ढक दिया। पानी का यह रूप देख कर हर कोई हतप्रभ था। किसान सतीश कुमार ने बताया कि उसने डेढ़ एकड़ जमीन लेकर बाजरे की बुवाई की थी। बाजरे की फसल बढ़ भी रही थी और अच्छी भी थी। लेकिन सोमवार को हुई बारिश ने उसके अरमानों पर पानी फेर दिया। पूरे डेढ़ एकड़ की फसल सीहा के पहाड़ से आए पानी से बर्बाद हो गई। पूरी खेत की फसल मिट्टी के नीचे दब गई, वहीं कई जगहों से फसल उखड़कर पानी में बह गई। पानी का बहाव इतना तेज था कि पूरे खेत में गहरा गड्डा बन गया। इसी तरह सत्यप्रकाश की कपास की फसल, प्रकाश की बाजरे की फसल, कबूल सिंह की बाजरे की पूरी तरह से चौपट हो गई। किसानों ने कहा कि प्रकृति की मार गरीब किसान पर क्यों पड़ती है। किसानों ने जिला प्रशासन उक्त खेतों की गिरदावरी करवा कर उचित मुआवजा देने की गुहार लगाई है। ताकि दोबारा से खेत को समतल करके फसल की बुवाई की जा सके।