रेवाड़ी। रेवाड़ी विधानसभा क्षेत्र में मैपिंग का ग्राफ गिर रहा है। इसके पीछे की मुख्य मुख्य वजह शहर में रहने वाले प्रवासी लोग हैं। औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र होने के कारण रेवाड़ी और धारूहेड़ा शहर में मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान के हजारों लोग रह रहे हैं।
यहां रह रही काफी आबादी यहां की मतदाता भी हैं। सर्वे में सामने आया है कि कई बार बीएलओ को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। जिले में ऐसी महिलाओं की संख्या भी काफी हैं जिनकी शादी बाहरी राज्यों से यहां हुई है। दस्तावेजों की कमियों या पते में बदलाव के कारण उनका डिजिटल मिलान करने में टीमों को मशक्कत करनी पड़ रही है।
मतदाता डिजिटल मैंपिंग प्रक्रिया अंमित दौर में
मतदाता डिजिटल मैपिंग की प्रक्रिया अब जिले में अंतिम दौर में है। रेवाड़ी, बावल और कोसली तीनों विधानसभा क्षेत्रों में कुल 7,38,321 मतदाताओं की डिजिटल मैपिंग की जानी है जिनमें से अब तक करीब 5.57 लाख (77 प्रतिशत) मतदाताओं का मिलान हो गया है।
ग्रामीण क्षेत्र वाले बावल और कोसली क्षेत्र में आंकड़ा 80 प्रतिशत के पार पहुंचा है। वहीं रेवाड़ी शहर का आंकड़ा 61 प्रतिशत तक पहुंचा गया है। रेवाड़ी में कुल मतदाता 2 लाख 57 हजार 842 हैं। डिजिटल मैपिंग 1 लाख 53 हजार 700 की हो चुकी है।
बावल में 2 लाख 30 हजार 283 मतदाता हैं यहां डिजिटल मैपिंग 1 लाख 90 की हो गई है। कोसली में 2 लाख 50 हजार 597 मतदाता हैं यहां मैपिंग 2 लाख 14 हजार 800 की हो चुकी है। रेवाड़ी में 61 प्रतिशत, बावल में 82 प्रतिशत और कोसली में 86 प्रतिशत मैपिंग हो चुकी है।
निर्वाचन कार्यालय की तरफ से अब ऐसे मतदाताओं की सूची तैयार की जाएगी जो बार-बार प्रयास के बाद भी नहीं मिल रहे हैं। उनको दस्तावेज जमा कराकर डिजिटल मैपिंग करानी होगी। अगर समय पर दस्तावेज जमा नहीं कराए तो उनका नाम काटा भी जा सकता है।
एसआईआर की प्रक्रिया अप्रैल में शुरू हो सकती है। इससे पहले मैपिंग का कार्य पूरा किया जाना है। इसके लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है। इस कार्य के लिए मार्च का माह काफी अहम है।
ग्रामीण बाहुल्य क्षेत्रों में डिजिटल मिलान का कार्य बेहतर
शहरी क्षेत्र के विपरीत जिले के ग्रामीण बाहुल्य क्षेत्रों में डिजिटल मिलान का कार्य बेहतर रहा है। डिजिटल मैपिंग का उद्देश्य फर्जी मतदान रोकना और मतदाता सूची को पूरी तरह पारदर्शी बनाना है। जो मतदाता सर्वे के दौरान अपने पते पर नहीं मिल रहे हैं या जिनका डेटा मैच नहीं हो रहा है उन्हें भविष्य में नोटिस देकर बुलाया जा सकता है। यदि उसके बाद भी कोई संतोषजनक जवाब या पहचान पुख्ता नहीं होती है तो निर्वाचन नियमावली के तहत उनके नाम मतदाता सूची से काटे जा सकते हैं। इधर, मतदाताओं के डबल वोट भी मिल रहे हैं। बीएलओ के सामने यह भी चुनौती है कि जब तक मतदाता लिखकर नहीं दे कि उसे कौन सी वोट रखनी है तब तक मैपिंग भी नहीं हो सकती है।