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Rewari News: गैस संकट के बीच मिड-डे मील जारी, बच्चों के भोजन पर नहीं पड़ेगा असर

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रेवाड़ी। गैस सिलिंडर की आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि मिड-डे मील योजना पर किसी भी तरह का असर नहीं पड़ेगा। सभी सरकारी विद्यालयों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि बच्चों के लिए दोपहर का भोजन हर हाल में नियमित रूप से जारी रखा जाए।
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विद्यार्थियों के पोषण स्तर और स्कूलों में उनकी उपस्थिति से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जाएगा। यदि किसी विद्यालय में गैस सिलिंडर की आपूर्ति बाधित होती है तो वहां वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर लकड़ी या अन्य सुरक्षित ईंधन का उपयोग किया जा सकता है।
विभाग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जाए ताकि भोजन निर्माण की प्रक्रिया प्रभावित न हो। जिले में कुल 638 मिड-डे मील केंद्र संचालित हैं जिनके माध्यम से लगभग 30 हजार विद्यार्थियों को प्रतिदिन दोपहर का भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
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यह योजना पहली से आठवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए चलाई जा रही है जिसका मुख्य उद्देश्य गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना और उन्हें स्कूल आने के लिए प्रेरित करना है।

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अपने खर्च पर करा रहीं सिलिंडर की व्यवस्था
कुंभावास स्थित सरकारी स्कूल की मिड-डे मील इंचार्ज संतोष यादव ने बताया कि फिलहाल विद्यालय में गैस सिलिंडर की कोई समस्या नहीं है। वे स्वयं अपने खर्च पर गैस सिलिंडर की व्यवस्था कर बच्चों के लिए भोजन तैयार करवा रही हैं ताकि किसी भी स्थिति में बच्चों के मिड-डे मील पर असर न पड़े। यदि भविष्य में सिलिंडर को लेकर किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न होती है तो ऐसी स्थिति में मिड-डे मील का भोजन लकड़ी पर पकाकर भी बच्चों को उपलब्ध कराया जाएगा।

निदेशालय के निर्देशों के अनुसार मिड-डे मील योजना जारी
कान्हड़वास स्थित प्राथमिक विद्यालय के मुख्य अध्यापक भूप सिंह ने बताया कि निदेशालय की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि मिड-डे मील योजना पर किसी भी तरह का असर नहीं पड़ना चाहिए। फिलहाल विद्यालय में मिड-डे मील निरंतर जारी है और बच्चों को नियमित रूप से भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना के तहत बच्चों को सप्ताहभर अलग-अलग पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है जिसमें सोया खिचड़ी, मीठा दलिया, चावल के साथ सफेद चना, चना दाल खिचड़ी और मिस्सी पराठा जैसे व्यंजन शामिल हैं।

वर्जन
सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि बच्चों का दोपहर का भोजन नियमित रूप से जारी रखा जाए और किसी भी स्थिति में लापरवाही न हो। जरूरत पड़ने पर लकड़ी जैसे सुरक्षित वैकल्पिक ईंधन का उपयोग किया जा सकता है और स्थानीय संसाधनों से भोजन व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
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- अली अहमद, जिला इंचार्ज, मिड-डे मील
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