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वार्ड की संख्या बढ़ाकर 6 नहीं की तो होगा नप चुनाव का बहिष्कार

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नेहरू पार्क में बैठक करते अनुसूचित जाति के लोग। - फोटो : Rewari
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नगर परिषद चुनाव में वार्डों की संख्या पांच करने के विरोध में रविवार को अनुसूचित समाज के लोगों की बैठक शहर के राव तुलाराम पार्क में हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि वार्ड की संख्या बढ़ाकर 6 नहीं की गई तो समाज नप चुनाव का बहिषकार कर सकता है। बैठक की अध्यक्षता कंवर सिंह ने की। बता दें कि 21 अगस्त को चंडीगढ़ स्थित नगर निकाय डायरेक्टर ऑफिस में एडहॉक कमेटी की मौजूदगी में रिजर्व वार्ड के लिए ड्रॉ निकाला गया था। इसमें एससी समाज के लोगों का आरोप है कि अर्बन लोकल बॉडी के एक्ट को दरकिनार कर साजिश के तहत वार्डग् की संख्या 6 की बजाय 5 कर दी गई है। इससे समाज के लोगों में रोष है।
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बैठक में उपस्थित समाज के लोगों ने सर्व सम्मति से निर्णय लिया कि नगर परिषद द्वारा इस विषय में जारी नोटिफिकेशन का अध्ययन कर उपायुक्त के समक्ष आपत्तियां दर्ज कराई जाएंगी। उसके उपरांत समाज के संवैधानिक हकों के लिए न्यायालय की शरण में जाएंगे। इसके अलावा बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि समाज को संवैधानिक अधिकार नहीं मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा। कंवर सिंह ने कहा कि यदि अनुसूचित जाति के लोगों को उनका हक नहीं मिला तो चुनाव का बहिष्कार भी किया जा सकता है। इस अवसर पर सेवानिवृत्त डीएसपी लाल सिंह, काशीराम, नाहरवाल, परमानंद सहित समाज के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।
नगर परिषद के 31 वार्डों के हाउस का कार्यकाल मार्च 2018 में पूरा हो चुका है। चुनाव फरवरी तक कराने के बाद हाउस का गठना किया जाना था, लेकिन वार्ड बंदी विवाद को लेकर इसमें देरी होती चली गई। डीसी से लेकर मामला कोर्ट तक गया। नई वार्ड बंदी से चुनाव कराने को लेकर नगर परिषद की ओर से 22 लाख रुपए की लागत से शहर में जातिगत सर्वे भी कराया। इस सर्वे के हिसाब से अनुसूचित जांति की संख्या को 7 वार्ड मिलने थे। इस समाज के लोगों को कहना है कि 7 तो दूर संख्या 6 की बजाय 5 कर दी गई। बता दें कि वर्ष 2015 के नप चुनाव में एससी वार्ड की संख्या 6 थी। तीन साल की देरी से 2013 में हुए चुनाव में इस संख्या को 5 कर दिया गया।
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2001 की जनगणना को आधार मानना गलत
एससी समाज के लोगों का कहना है कि एससी वार्ड रिजर्व करने में 2001 की जनसंख्या को आधार बनाना गलत है। इसके बाद 2011 की जनगणना हो चुकी है। वहीं नप की ओर से भी खुद सर्वे कराया जा चुका है। जन संख्या बढ़ने के हिसाब से वार्ड की संख्या भी बढ़ना चाहिए। मामले में पैरवी कर रहे परमानंद का कहना है कि संविधान ने जो अधिकार दिए हैं, उनके लिए संघर्ष किया जा रहा है।
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