मनेठी में एम्स को लेकर जिला उपायुक्त के साथ आयोजित बैठक में भाग लेते हुए एम्स संघर्ष समिति के सदस?
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एम्स संघर्ष समिति मनेठी के सदस्य सोमवार को समिति के अध्यक्ष व सरपंच श्योताज सिंह के नेतृत्व में राव इंद्रजीत सिंह से मिलने के बाद डीसी यशेंद्र सिंह से मिले। संघर्ष समिति ने डीसी को मनेठी ग्राम पंचायत द्वारा एम्स के लिए दी गई जमीन के बारे में अवगत कराया। डीसी के साथ हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि 412 एकड़ जमीन अरावली की है या नहीं इस पर जल्द जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
बता दें कि ग्रामीणों का कहना है कि जो 412 एकड़ जमीन वन विभाग की ओर से अरावली की बताई गई है, उसका प्रस्ताव कभी भी ग्रामीणों की ओर से नहीं दिया गया। ऐसे में जमीन भी अरावली क्षेत्र में नहीं आती है। जबकि वन विभाग ने कहा था कि पूरी जमीन अरावली पौधरोपण के लिए दी गई थी। बैठक में समिति सदस्य कर्नल राजेंद्र सिंह, एडवोकेट राजेंद्र सिंह, जिला पार्षद आजाद सिंह नांधा, सचिव ओमप्रकाश सैन, मास्टर लक्ष्मण सिंह, कप्तान मनफूल सिंह, बीडी यादव, एचडी यादव, घनश्याम सरपंच, अशोक कुमार ठेकेदार व मास्टर भारत सिंह आदि मौजूद थे।
जमीन अरावली क्षेत्र में है या नहीं, इससे आगे नहीं बढ़ पा रही कार्रवाई
रविवार को एम्स संघर्ष समिति नेे बैठक कर प्रशासन व सरकार को पांच फरवरी 2020 तक का अल्टीमेटम दिया था। समिति का कहना था कि यदि पांच फरवरी तक मनेठी में एम्स का शिलान्यास नहीं हुआ तो आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसके तहत ही समिति के सदस्य सोमवार को ग्रामीण केंद्रीय राज्य मंत्री से मिलने के बाद डीसी यशेंद्र सिंह के साथ बैठक करने पहुंचे थे। बैठक में राजस्व अधिकारियों से लेकर डीएफओ सुंदर सांभरिया भी मौजूद थे। लेकिन एक बार फिर से 412 एकड़ जमीन अरावली की है या नहीं, इस पर ही पेंच फंस गया। जबकि वन सलाहकार समिति अरावली की अड़चन बताने के बाद से लगातार ग्रामीण इस जमीन को वन विभाग को पौधरोपण के लिए नहीं देने की बात कह रही हैं। करीब 6 माह बीत जाने के बाद भी जिम्मेदार यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि जमीन अरावली की है या पंचायत की। बता दें कि सीएम एम्स निर्माण पर ग्रामीणों द्वारा जमीन उपलब्ध कराने की बात कह चुके हैं। बीते कुछ माह में अरावली क्षेत्र से अलग मनेठी व आसपास के गांव में जमीन तलाशने का काम भी किया जा चुका है।