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Rewari News: सही समय पर बारिश से गेहूं की बंपर पैदावार, प्रति एकड़ दो क्विंटल फायदा

Thu, 02 May 2024 03:06 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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रेवाड़ी। अनाज मंडी में गेहूं को समेटते श्रमिक। संवाद
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रेवाड़ी। इस बार गेहूं का प्रति एकड़ 4 से 5 मण अधिक उत्पादन हुआ है। गेहूं के उत्पादन में वृद्धि में कृषि वैज्ञानिक समय पर हुई पर्याप्त बारिश को मान रहे हैं। इससे गेहूं की फसल को नुकसान कम हुआ है। इस बार किसानों को प्रति एकड़ एक से दो क्विंटल का फायदा हुआ है।
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एक मण में 40 किलो गेहूं होता है। इसके अलावा सरसों का उत्पादन कम हुआ है। इसके लिए इस बार पाला पड़ने को मुख्य वजह माना गया है। बता दें कि कुछ दिनों पहले चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र बावल में 6 जिलों के कृषि व बागवानी अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र और क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों की टीम ने मई के दौरान बिजाई की जाने वाली फसल को लेकर मंथन किया था। इस दौरान पिछली फसल गेहूं व सरसों का रिव्यू किया गया था। इसमें पाया गया था कि समय पर बरसात होने से गेहूं की फसल को नुकसान कम हुआ है और उत्पादन बढ़ा है।

जहां सरसों का रकबा साल दर साल बढ़ रहा है। वहीं फसल गेहूं का रकबा गिरता जा रहा है। कृषि विभाग के आंकड़े भी बताते हैं कि वर्ष 2015 में गेहूं का रकबा जिले में 51 हजार हेक्टेयर था, लेकिन अब यह घटकर 34500 हेक्टेयर पर आ गया है। यानी 9 साल में 16 हजार हेक्टेयर रकबे में कमी आई है। कृषि विभाग के पोर्टल पर मात्र 3207 किसानों ने सरकारी समर्थन मूल्य पर बिक्री करने के लिए गेहूं का पंजीकरण करवाया है। किसानों ने लगभग 19 हजार हेक्टेयर फसल का पंजीकरण कराया है। जबकि जिले में सरसों का रकबा वर्ष 2015 में 63 हजार हेक्टेयर था, जो अब बढ़कर 78 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गया है। दूसरे किसानों ने फसल विविधिकरण को अपनाते हुए सब्जियों की खेती भी शुरू कर दी है।
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वहीं किसान राजेश, मुकेश, हरिपाल ने बताया कि इस बार गेहूं की फसल काफी अच्छी हुई है। प्रति एकड़ उन्हें डेढ़ सौ से 200 किलो का फायदा हुआ है। इसका मुख्य कारण मौसम का अच्छा रहना था। हालांकि सरसों की फसल को कुछ नुकसान जरूर हुआ है, लेकिन गेहूं से वह कवर हो चुका है।

इंसेट
मिट्टी और पानी के नमूने लेने का सही समय

कृषि अधिकारियों ने बताया कि अब इस समय खेत खाली हो गए हैं। खेतों में कोई फसल नहीं उगी है। ऐसे में मिट्टी और पानी के नमूने लेने का सही समय है। किसानों को अगली फसल की बिजाई से पहले ये दोनों टेस्टिंग करानी चाहिए। क्योंकि इससे भूमि में कौनसे पोषक तत्व की कमी है, ये पता लग सकेगा। समय पर जमीन में कमी को दूर किया जा सकता है। इससे उत्पादन भी बढ़ेगा।

वर्जन
फसली रिव्यू में ये सामने आया है कि गेहूं का प्रति एकड़ 55 से 60 मण उत्पादन हुआ है। पिछले वर्ष की बात करें तो यह आंकड़ा 50 से 55 मण प्रति एकड़ था। सरसों का उत्पादन कम बताया गया है। प्रति एकड़ में 20 से 22 मण के आसपास ही उत्पादन है।-डॉ. धर्मबीर, क्षेत्रीय निदेशक
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