कोसली। मुख्यमंत्री की घोषणा के 6 साल बाद भी कोसली रेलवे फाटक नंबर 19 पर अंडरपास नहीं बनने से ग्रामीणों में रोष है। उनका कहना है कि वर्ष 2010 में शुरू हुई ब्रिज निर्माण कार्य के दौरान कोसली में रेलवे फाटक नंबर 19 को बंद कर दिया गया था। इसके चलते क्षेत्रवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में बीते 12 साल से 30 से अधिक गांव व कोसली कस्बे के लोगों को जान जोखिम में डालकर रेलवे लाइन पार करनी पड़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के लोगों द्वारा बार-बार मांग करने के बाद भी बंद फाटक के स्थान पर छोटा अंडरपास बनाने की घोषणा वर्ष 2016 में मुख्यमंत्री ने कोसली में सभा के दौरान की थी। 20 अक्तूबर 2017 में सरकार से बजट मिलने के बाद पीडब्ल्यूडी ने अंडरपास निर्माण के लिए रेलवे विभाग के पास रुपये जमा कर दिए थे, बावजूद इसके निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। उनका कहना है कि बंद फाटक के स्थान पर अंडरपास का निर्माण न होने से लोगों के पास दो विकल्प है। पहला दो किलोमीटर दूरी से घूम कर बाजार पहुंचना पड़ता है। दूसरा जान जोखिम में डालकर लाइन पार कर बाजार पहुंचना पड़ रहा है। लोग इसलिए अंडरपास की मांग कर रहे हैं। ताकि फाटक के दोनों ओर ग्रामीणों के साथ-साथ छोटे वाहनों का भी आवागमन हो सके। पीडब्ल्यूडी के कनिष्ठ अभियंता युधबीर का कहना है कि विभाग में फाइल कार्रवाई के चल रही है। स्वीकृति मिलते ही टेंडर करवाते ही काम शुरू हो जाएगा।
अंडरपास का काम शुरू करने की मांग उठाई
सभी प्रकार की औपचारिकता पूरी होने के बावजूद भी लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जनप्रतिनिधियों से कई बार शिकायत की जा चुकी है। धरना प्रदर्शन भी किया गया। बावजूद इसके कोई समाधान नहीं हुआ।
अंडरपास बनने से लोगों को मिलेगी राहत
क्षेत्र के लगभग 30 गावों के लोगों को अंडरपास न होने से दो किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है या फिर जान जोखिम में डालकर रेलवे लाइन पार करनी पड़ती है। इसके अलावा बाजार भी दो भागों में बंटा हुआ है। यहां फाटक नंबर 19 पर अंडरपास बनने के बाद ही लोगों को राहत मिलेगी।