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Rewari News: सीएक्यूएम की क्लोजर नीति पर कोबी ने जताई चिंता

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बहादुरगढ़। कॉन्फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज (कोबी) की शुक्रवार को हुई बैठक में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की ओर से औद्योगिक इकाइयों के निरीक्षण और क्लोजर नोटिस जारी करने की कार्रवाई पर चर्चा की गई।
कोबी के पदाधिकारियों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए सीएक्यूएम का निरीक्षण आवश्यक है लेकिन कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है जब किसी उद्योग में मशीन, उपकरण या प्रदूषण नियंत्रण यंत्र खराब हो जाता है और उद्योग पहले से ही उसे ठीक कराने की प्रक्रिया में होता है।
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कई मामलों में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) से आवश्यक कंसेंट और अनुमति भी ली जा चुकी होती है। इसके बाद भी बिना स्थिति समझे सीधे क्लोजर नोटिस जारी कर दिया जाता है।

बताया गया कि किसी उद्योग पर उत्पादन के साथ कर्मचारियों के वेतन, परिवारों की आजीविका, निर्यात ऑर्डर, बैंक लोन, सप्लायर भुगतान और सरकारी देनदारियों जैसी जिम्मेदारियां होती हैं। ऐसे में अचानक बंदी से सैकड़ों परिवारों पर संकट आ जाता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होती है।

कोबी ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री, सीएक्यूएम चेयरमैन, तकनीकी टीम प्रमुख, हरियाणा के मुख्यमंत्री और उद्योग महानिदेशक सहित संबंधित विभागों को पत्र लिखकर मांग की है कि क्लोजर नोटिस से पहले उद्योगों को कम से कम 30 से 60 दिन का सुधारात्मक समय दिया जाए।
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इस दौरान विभाग मार्गदर्शन दे और आवश्यक हो तो पेनल्टी भी लगाई जाए, लेकिन बिना अवसर दिए बंदी उचित नहीं है। कोबी ने सवाल उठाया कि जब उद्योग बुनियादी सुविधाओं सड़क, सीवरेज, बिजली और जल निकासी के लिए मांग करते हैं तो उन पर त्वरित कार्रवाई क्यों नहीं होती। बैठक में विपिन बजाज, प्रदीप कौल, सुरेंद्र वशिष्ठ, कोषाध्यक्ष अशोक कुमार मित्तल मौजूद रहे।
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