कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली-जयपुर हाइवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर शनिवार को 132वें दिन भी किसानों का धरना जारी रहा। धरना स्थल पर कोरोना संक्रमण के बचाव को लेकर न केवल लोगों को जागरूक किया जा रहा है बल्कि संक्रमण की रोकथाम के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों ने आंदोलन की शक्ति बढ़ाने और मोर्चों को और ज्यादा मजबूत करने के लिए हर स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं।
बता दें कि 13 दिसंबर को दिल्ली कूच करते समय हरियाणा पुलिस ने दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर रोक दिया था। इसके बाद से किसानों ने यहीं पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसानों के आंदोलन के बाद राजस्थान के अलावा हरियाणा, पंजाब, गुजरात, यूपी, महाराष्ट्र, केरला सहित अन्य राज्यों के किसानों ने यहां पहुंचकर आंदोलनकारी किसानों को समर्थन देना शुरू कर दिया था।
मांगें पूरी होने तक करेंगे आंदोलन
धरने पर किसान नेता डॉ. माधव, राजाराम मील,रामकिशन महलावत, अमराराम, तारा सिंह, पेमाराम व छगन चौधरी ने कहा कि तपती दोपहरी मेें भी किसान सड़कों पर खुले आसमान के नीचे जीवनयापन कर रहा है। इसके बाद भी सरकार किसानों की सुध नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि किसी जनतांत्रिक रवैए वाली सरकार के सामने इतना बड़ा और लंबा आंदोलन चलाने की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन सरकार के अड़ियल रवैये के कारण देश के अन्नदाता को सड़कों पर सोना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अब केंद्र सरकार किसान आंदोलन को कोरोना महामारी के बहाने खत्म कर देना चाहती है। लेकिन किसान भी कमर कस कर बैठा है। उसने भी सरकार और महामारी दोनों को मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी कर ली है।