फसलों की कटाई का कार्य शुरू होते ही दूसरे राज्यों से मजदूरों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। दूसरे प्रांत से आने वाले मजदूरों को यहां लाकर उनका पुलिस वेरीफिकेशन भी नहीं कराया जाता। बाहरी मजदूरों के साथ कई बार बदमाश भी आ जाते हैं जो क्राइम कर पुलिस के लिए सिरदर्द बन जाते है।
पुलिस ने बाहरी राज्यों से आने वाले मजदूरों का वेरीफिकेशन कराने का नियम भूल गई, लेकिन खाकी अपने ही नियम को खुद भूल गई है। हर साल फसलों की कटाई के समय हजारों की संख्या में बाहरी मजदूर आते हैं, जो दूसरे राज्यों के होते हैं।
पुलिस प्रशासन की ओर से दूसरे राज्यों से आने वाले मजदूरों का वेरीफिकेशन कराना अनिवार्य कर रखा है। हालांकि मजदूरों को लेकर आने का कार्य ठेकेदार करते हैं। वह भी नियमों की पालना नहीं करते। ठेकेदार मजदूरों को वहां से अपनी दर तय करके लाते हैं तो यहां पर किसानों से मनमाफिक मजदूरी वसूलते हैं।
अब फसलों की कटाई शुरू होने के साथ इनके आने का सिलसिला तेज हो गया है। मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए किसान जल्दी खेतों में तैयार फसल को काट लेना चाहते हैं, ताकि बची फसल को भी मौसम से बचाया जा सके। इसी को देखते हुए हर गांव में ठेकेदारों ने यूपी और बिहार के लोगों से संपर्क कर रखा है तथा वह लावणी के दिनों में उन्हें यहां बुलाते हैं।
इन दिनों खंड खोल के हर गांव में ऐसे मजदूरों की संख्या देखी जा सकती है। ये मजदूर तीन माह तक ठेकेदार के कुओं पर ही रहते हैं। लेकिन ठेकेदार ऐसे बाहरी लोगों की वेरीफिकेशन संबंधी कागजात लेना भी मुनासिब नहीं समझता है और न ही इसकी सूचना सरपंच व नजदीकी पुलिस स्टेशन को दी जाती है।
वेरीफिकेशन सिर्फ खानापूर्ति
अन्य राज्यों से मजदूरी के लिए यहां आने वाले मजदूरों का किसानों के पास भी पहचान से संबंधित कोई कागजात नहीं होते हैं। ठेकेदार सिर्फ अपना मुनाफा देखता है। उन्हें नहीं पता कि जो लोग उसके पास काम कर रहे हैं, वे अपने गांव में क्या करते हैं और इनका रिकॉर्ड क्या है? कई बार मजदूरों के साथ अपने राज्य की पुलिस से बचने के लिए अपराधी भी शरण ले लेते हैं और वह क्राइम कर पुलिस के लिए चुनौती पैदा कर देते हैं।
जल्द ही गांवाें में दोबारा मुनादी कराकर इस बारे में सरपंचों को आगाह किया जाएगा। ताकि बाहरी लोगों का वेरीफिकेशन किया जा सके। बाहर से आने वाले हर मजदूर की जांच पड़ताल की जाएगी।
थाना खोल प्रभारी, सुरेंद्र कुमार