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रेवाड़ी के 47 हजार परिवार कैरोसिन मुक्त!

Thu, 13 Oct 2016 01:05 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
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प्रदेश सरकार का कैरोसिन मुक्त अभियान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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केंद्र एवं प्रदेश सरकार का कैरोसिन मुक्त अभियान का असर रेवाड़ी में भी दिखने लगा है। रेवाड़ी में जनवरी से सितंबर महिने तक एक भी उपभोक्ता ने कैरोसिन ऑयल नहीं खरीदा है। जनवरी महीने से पहले जिले कुल 296 डिपो होल्डर द्वारा करीब एक लाख अस्सी हजार लीटर कैरोसिन ऑयल 47 हजार बीपीएल परिवारों को बांटा जाता था। लेकिन इन परिवारों ने जनवरी के बाद इसे नहीं लिया।
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प्रदेश सरकार की ओर से अधिकारिक रूप से आठ जिलों को कैरोसिन फ्री घोषित किया जा चुका है। लेेकिन कुछ तकनीकी पहलुओ के चलते रेवाड़ी इन आठ जिलों में शामिल नहीं हो पाया था। जबकि यहां पर बीते नौ माह से कैरोसिन का उपभोग बंद हो चुका है।

उज्जवला से कैरोसिन को रिप्लेस करने की है योजना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से उज्जवला योजना का शुभारंभ किया गया था। योजना का उद्देश्य देश की महिलाओं को कैरोसिन की जगह कुकिंग गैस उपलब्ध कराना है। प्रदेश के बीपीएल परिवारों को भी कैरोसिन से मुक्ति दिलाने के लिए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धमेंद्र प्रधान ने मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर की उपस्थित में दस अक्तूबर को पानीपत से उज्जवला योजना का शुभारंभ किया था। इसी दिन मुख्यमंत्री ने प्रदेश के आठ जिलों को कैरोसिन मुक्त भी घोषित किया था। योजना के माध्यम से बीपीएल परिवारों की महिला के नाम मुफ्त में गैस सिलेंडर दिया जाना है। जिले में अभी तक इस योजना के तहत चार हजार से ज्यादा लोगों ने एप्लाई किया था। जिनमें से करीब 3700 परिवारों को कुकिंग गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
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दो लाख से अधिक कुकिंग गैस कनेक्शन हैं जिले मे
रेवाड़ी में विभिन्न कंपनियों की पंद्रह गैस एजेंसिया कुकिंग गैस वितरण कर रही हैं। इन गैस एजेंसियों ने जिले में भर में दो लाख से ज्यादा कनेक्शन लोगों को दिए हुए हैं। जिले में करीब 87 हजार राशन कार्ड हैं। रेवाड़ी के करीब 47 हजार बीपीएल में करीब पांच हजार राशन कार्ड सेंटर बीपीएल के हैं। उज्जवला योजना के तहत जिन बीपीएल परिवारों के पास पहले से कुकिंग गैस उपलब्ध है। ऐसे परिवारों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। लेकिन जिन परिवारों के पास कुकिंग गैस उपलब्ध नहीं है। वह राशन कार्ड के साथ फार्म भरकर जिला खाद्य आपूर्ति एवं नियंत्रण विभाग में जाकर जमा करा सकता है।

ये हैं कैरोसिन से खाना पकाने के नुकसान
टॉक्सिक सब्स्टांस एंड डिजिज रेजिस्ट्री(एटीएसडीआर) के अनुसार जो कैरोसिन ऑयल से खाना पकाते हैं उनको दूसरे लोगों की तुलना में अधिक सांस की बीमारी होती है। इसके कैरोसिन के रेगुलर प्रयोग से किडनी, ब्लड क्लोटस, दिमागी एवं हार्ट संबधी बीमारियां होने का सबसे ज्यादा डर बना रहता है। इसी के साथ कैरोसिन से निकलने वाली कार्बनडाई आक्साइड भी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होती है। इसको देखते हुए ही सरकारें कैरोसिन को कुकिंग गैस से रिप्लेस करने पर जोर दे रही हैं।

अब दो हजार मीट्रिक टन राशन में नहीं लगेगी सैंध
जिले में करीब 296 डिपो होल्डर के माध्यम से प्रत्येक महीने करीब दो हजार मीट्रिक टन राशन का वितरण किया जाता है। प्रदेश मेें ही नहीं बल्कि पूरे देश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में धांधली के आरोप लगते रहे हैं। इसी से निपटने के लिए अब हरियाणा भी पूरी तरह से तैयार हो चुका है। जिले मेें एक नवंबर से सभी डिपो से बॉयोमेट्रिक मशीन से राशन का वितरण किया जाएगा। जिले में करीब नब्बे फीसदी राशन कार्डों को आधार से जोडने का काम पूरा किया जा चुका है। अब परिवार के सदस्य के थंब निसान मैच करने के बाद ही राशन दिेया जाएगा। हालांकि जिन दस फीसदी लोगों ने राशन कार्ड को आधार से नहीं जुड़वाया है। उनको राशन मिलने में दिक्कत आ सकती है।

बायोमैट्रिक मशीन के डर से डिपो सरेंडर करने लगे लोग
खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के अनुसार बीते दिनों ही उन्होनें सभी डिपो होल्डर को बॉयोमेट्रिक मशीन ऑपरेट करने की ट्रेनिंग दी है। उन्होंने बताया कि एक नवंबर से प्रत्येक डिपो पर बॉयोमेट्रिक मशीन से राशन दिए जाने की घोषणा के बाद करीब छह डिपो होल्डर अपने डिपो सरेंडर कर चुक हैं। गौरतलब है कि बॉयोमैट्रिक मशीन इंटरनेट के माध्यम से सीधे मुख्यालय से जुड़ेगी। जिसके चलते धांधली पर नियंत्रण पाए जाने की आशा है।
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-वर्जन- जिले में जनवरी महिने से किसी भी डिपो कैरोसिन ऑयल नहीं उठाया है। अर्थात जिले में जनवरी से कैरोसिन बंद हैं। हमारा जिला कैरोसिन फ्री हो चुका है,जिसकी अधिकारिक घोषणा करना बाकी है। इससे पहले जिले में 180 केएल कैरोसिन ऑयल की खपत होती थी। जिले में उज्जवला योजना के तहत कनेक्शन दिए जा रहे है।
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-डॉ प्रेमपाल सिंह, डीएफएसई, रेवाड़ी।
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