रेवाड़ी। प्रदेश में अपने दम पर पहली बार सत्ता में आई भाजपा को यहां तक पहुंचाने में रेवाड़ी का भी अहम रोल रहा। दक्षिण हरियाणा की राजनीतिक राजधानी रेवाड़ी जिले के लोगों ने चुनाव में पूरा पासा पलटा। कांग्रेस से तीनों सीटें छीन कर भाजपा की झोली में डालीं। एक विधायक मंत्री भी बने। खास बात यह है कि एक साल में मुख्यमंत्री भी औसत ढाई महीने में एक बार रेवाड़ी आए पर बदला कुछ नहीं। जिलावासियों ने केंद्र की भाजपा सरकार के साथ सीधा तालमेल रखना चाहा ताकि विकास में लगातार पिछड़े रहे जिले के दिन भी फिरें। आज सरकार भले ही अपने कार्यकाल का एक साल पूरा कर रही हो लेकिन जिले की नई तस्वीर का कैनवास तैयार है और रंग भरने के इंतजार में है। तीनों विधानसभा क्षेत्रों से चुने जनप्रतिनिधि दावा कर रहे हैं कि रेवाड़ी में बहुत कुछ बदलेगा, कई योजनाएं बन रही हैं, जल्द धरातल पर सामने होंगी। हकीकत यह है कि एक साल में जिले में कोई बड़ी उपलब्धि सरकार की नहीं रही, जिससे जनता को तत्काल फायदा मिला हो। केवल घोषणाएं हुई। जनता को सरकार से बहुत उम्मीदें हैं। सरकार के पास भी चार साल का वक्त है। ऐसे में देखना यह है कि सरकार इन सालों में पिछड़ रहे रेवाड़ी जिले के लिए क्या कुछ कर पाएगी।
1. मनेठी में एम्स: मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बावल में आयोजित रैली में मनेठी में एम्स खोलने की घोषणा की। मनेठी पंचायत ने इसके लिए जमीन देने का प्रस्ताव पास करके भी प्रशासन को सौंप दिया। अभी इस मामले में कदम आगे नहीं बढ़ पाए हैं। दावा किया जा रहा है कि सीएम ने इसके लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है।
2. डबल फाटक पर अंडरपास: शहर में रेलवे लाइनों का जाल बिछा है। शहर के बीच से रेलवे लाइन गुजर रही है। जंक्शन के पास ही डबल फाटक ज्यादातर समय बंद रहने से शहर दो विभागों में बंटा रहता है। साथ ही दूसरी तरफ 50 से ज्यादा गांव हैं। यहां अंडरपास बनाने की घोषणा हुई, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ। दावा है इसके लिए मंजूरी मिल चुकी है।
3. राजकीय कॉलेज: शिक्षा के क्षेत्र में ठीक-ठाक स्थिति रखने वाले रेवाड़ी जिला मुख्यालय पर एक भी सरकारी कॉलेज नहीं है। घोषणा की गई थी कि जल्द ही कॉलेज खुलेगा, इसके लिए अभी तक कोई प्रयास नहीं हुए हैं। विद्यार्थियों को मोटी फीस देकर प्राइवेट कॉलेजों या फिर अन्य शहरों में पढ़ाई करनी पड़ रही है।
4. रेवाड़ी में बाईपास: शहर के बाहर बाईपास बनाने की घोषणा मुख्यमंत्री ने यहां रैली में की थी, ताकि भारी वाहन बाहर से निकल सकें। इस दिशा में भी अभी कोई ज्यादा प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। अभी तक जमीन अधिग्रहण का काम तक शुरू नहीं हुआ। वाहन शहर के बीच से गुजर रहे हैं और समस्या बनी हुई है।
5. पेयजल: बरसात की कमी दक्षिणी हरियाणा हमेशा झेलता रहा है। चुनाव भी इसी मुद्दे पर लड़के जाते हैं, लेकिन जनता को पर्याप्त पेयजल मुनासिब नहीं हो रहा। मुख्यमंत्री ने 143 करोड़ के प्रोजेक्ट का नारनौल में शुभारंभ किया है अब देखना यह है कि इस प्रोजेक्ट से लोगों को कब तक राहत मिलती है।
6. सर्कुलर रोड: शहर की जीवन रेखा कहे जाने वाला सर्कुलर रोड भी चुनावी मुद्दा था। बाद में इसे ठीक करने की घोषणा हुई। विधायक ने कहा था कि दिल्ली जैसी सड़क बना दूंगा। सड़क देखने लायक नहीं होगी, लेकिन कांग्रेस के कार्यकाल में सीसी रोड का काम शुरू हुआ जो लेकिन चुनाव के बाद बची सड़क पर डामरीकरण कर दिया गया।
7. आरओबी: कोसली में धनिया मोड़ से नाहर रोड तक अधूरे बाईपास के बीच आरओबी बनाने की घोषणा की थी लेकिन काम आगे नहीं बढ़ा। अभी भी लोग परेशान हैं। दावा है कि इसके लिए 65 करोड़ रुपये मंजूर हो चुके हैं। जनता को कोई फायदा नहीं मिला।
कचरा उठाने तक की व्यवस्था नहीं
रेवाड़ी शहर में गंदगी का अंबार लगा है। स्वच्छ भारत रैंकिंग में शहर 476 शहरों में 469वीं रैंक मिली थी। रिपोर्ट जारी होने के बाद भी दो दिन औपचारिक विशेष अभियान चला, लेकिन स्थिति फिर वही है। विधायक ने शहर के बाहर कचरा निस्तारण के लिए प्लांट लगाने का वादा किया था लेकिन अभी कुछ नहीं हुआ।
एक साल में पांच बार आए सीएम
एक साल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर जिले में पांच बार आ चुके हैं। कुर्सी संभालने के कुछ समय बाद जनता का धन्यवाद करने पीडब्लयूडी रेस्ट हाउस पहुंचे तो इसके बाद केएलपी कॉलेज और यादव कल्याण सभा के कार्यक्रम में शिरकत की। रेवाड़ी और बावल में जनसभाओं में भी पहुंचे थे।
दावा: बदलेगी तस्वीर
सहकारिता राज्य मंत्री बिक्रम सिंह, रेवाड़ी विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास और बावल विधायक डॉ बनवारी लाल दावा करते हैं कि अरबों रुपये की योजनाएं पाइप लाइन में है। जल्द ही काम शुरू होगा तो जिले की तस्वीर बदल जाएगी। अभी एक साल हुआ है। जनता से किया हर वादा पूरा करेंगे।