रेवाड़ी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से एडीआर सेंटर के सभागार में वीरवार को एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें बाल संरक्षण और किशोर न्याय को सशक्त बनाने की जानकारी दी गई।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अमित वर्मा ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा हेतु सभी संबंधित विभागों का समन्वित, उत्तरदायी एवं संवेदनशील दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को पॉक्सो अधिनियम, 2012 के अंतर्गत मामलों की जांच प्रक्रिया, बाल पीड़ितों के साथ बाल-अनुकूल व्यवहार, साक्ष्य संकलन की विधि तथा पीड़ितों को उपलब्ध विधिक सहायता सेवाओं के संबंध में विस्तार से अवगत कराया गया।
इसके अतिरिक्त किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के अंतर्गत कानून के संघर्ष में आए बालकों सीआईसीएल एवं देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बालकों (सीएनसीपी) की पहचान, आयु सत्यापन की प्रक्रिया, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष प्रस्तुतिकरण, डायवर्जन प्रक्रिया तथा बाल अधिकारों के संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया।
इस अवसर पर रिसोर्स पर्सन के रूप में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश लोकेश गुप्ता, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी-सह-प्रधान न्यायाधीश, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड से अर्चना ने विषयों पर गहन, व्यावहारिक एवं जानकारी प्रदान की।
डीएसपी मुख्यालय रविंद्र तथा डीएसपी जोगिंदर शर्मा ने पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाल मामलों में विधिक प्रावधानों का कड़ाई से पालन करते हुए मानवीय एवं संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया जाए।