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Rewari News: साहबी नदी को दूषित कर रहीं हैं औद्योगिक इकाइयां, अब होगी यह कार्रवाई

Sat, 29 Apr 2023 11:56 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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साहबी बैराज में जमा दूषित पानी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
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रेवाड़ी। मसानी बैराज स्थित साहबी नदी में प्रदेश सरकार ने झील बनाने का दावा किया गया था लेकिन वर्तमान में यह नदी प्रदूषण का कटोरा बन गई है। शहर की 20 से अधिक औद्योगिक इकाइयों का अपशिष्ट सीवर लाइन में छोड़ा जा रहा है। इसे अपशिष्ट उपचार संयंत्र (ईटीपी) में छोड़ा जाना चाहिए था, क्योंकि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में सीवर का पानी पूरी तरह ट्रीट नहीं हो पाता। यही कारण है कि साहबी में छोड़े जाने वाले एसटीपी के पानी के नमूने भी फेल हो रहे हैं। यह जवाब जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) ने फटकार के बाद एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) कोर्ट में दाखिल किया है।
जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग ने इन इकाइयों को नोटिस देने के साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी कार्रवाई के लिए लिखा है। एक मई से क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पीएचईडी के अधिकारी मिलकर इन इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। साहबी नदी में छोड़े जाने वाले एसटीपी के पानी से नदी क्षेत्र की भूमि बंजर हो रही है। खरखड़ा निवासी प्रकाश यादव ने एनजीटी में याचिका दायर कर दूषित पानी के रोकथाम की मांग की थी।
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तीन बार नदी क्षेत्र के पानी के सैंपल लिए, सभी फेल
पिछले 20 दिन के अंतराल में एडीसी के नेतृत्व में करीब तीन बार साहबी नदी क्षेत्र के पानी के सैंपल लिए गए थे, लेकिन सभी रिपोर्ट फेल आई। इसके बाद जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग ने एनजीटी कोर्ट में जवाब दाखिल करके बताया कि रेवाड़ी शहर की करीब 20 औद्योगिक इकाइयों के अपशिष्ट को भी घरेलू सीवर लाइनों में डाला जा रहा है, जिससे एसटीपी में सीवर के पानी को पूरी तरह ट्रीट नहीं किया जा रहा। जवाब में बताया गया कि इन फैक्टरियों में ईटीपी नहीं बनाया गया है।
झील बनाकर पर्यटन स्थल बनाने का था प्रोजेक्ट
प्रदेश सरकार की ओर से साहबी नदी में पानी छोड़कर यहां पर्यटकों के लिए झील विकसित करने का प्रोजेक्ट तैयार किया गया था। इसके लिए नदी में मसानी बैराज में पानी भी छोड़ा गया था, लेकिन यह पानी प्रदूषित होने के कारण आसपास की उपजाऊ भूमि बंजर बनने लगी तो ग्रामीणों ने एनजीटी कोर्ट का सहारा लिया। ऐसे में साहबी में झील विकसित करने का सपना अधूरा रहता नजर आ रहा है।
आसपास की भूमि बन रही बंजर
साहबी नदी में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण धारूहेड़ा और जनस्वास्थ्य विभाग के पांच सहित कुल छह एसटीपी का पानी साहबी नदी क्षेत्र में छोड़ा जा रहा है, लेकिन इस पानी से आसपास के गांव खरखड़ा, निखरी व खलियावास सहित अन्य गांवों का भूमिगत जलस्तर खराब हो रहा है और उपजाऊ भूमि बंजर होती जा रही है।
एनजीटी की फटकार के दिया जवाब
नदी क्षेत्र में सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद एनजीटी ने जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग को कड़ी फटकार लगाई थी, जिसमें एक माह में सुधार करने के आदेश दिए थे। इसके बाद पीएचईडी ने शहर के कारखानों को दोषी ठहरा दिया।

इन क्षेत्रों के उद्योगों में नहीं ईटीपी
बता दें कि पीएचईडी ने जिन कारखानों को नोटिस दिया है उनमें अधिकांश शहर के उत्तम नगर, नसीयाजी रोड व दिल्ली रोड क्षेत्र में स्थित है। बताया गया है कि ये कारखाने प्लास्टिक और पीतल के अपशिष्ट को भी सीवर लाइनों में छोड़ रहे हैं। नियमानुसार सीवर लाइनों में छोड़ने से पूर्व इन अपशिष्टों को ईटीपी छोड़ा जाना चाहिए।


शहर कुछ कारखानों द्वारा घरेलू सीवर लाइनों में ही कारखानों के अपशिष्टों को डाला जा रहा है, जबकि सीवर लाइन में डालने से ईटीपी में छोड़ा जाना चाहिए। कुछ कारखानों की ओर से नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। विभाग की ओर से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कार्रवाई के लिए लिखा गया है।
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-भागीराम, एसडीओ, जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग, रेवाड़ी।


जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग की ओर से उनके पास करीब 20 औद्योगिक इकाइयों की सूची आई है, जिन द्वारा अपशिष्ट सीवर लाइनों में छोड़ा जा रहा है। औद्योगिक इकाइयों को ईटीपी लगाना जरूरी है। जिनके पास ईटीपी नहीं उनकी जांच कार्रवाई करेंगे।
-विनोद बालियान, आरओ, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, रेवाड़ी।
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