बारिश में संक्रामक रोग बढ़ता जा रहा है। एक तरफ खांसी-जुुकाम के साथ वायरल के मरीज बढ़ रहे हैं तो वहीं टीनिया चर्म रोग के भी मरीजों की संख्या बढ़ रही है। फंगस किस्म की यह बीमारी बरसात में ज्यादा होती है। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में इस बीमारी से पीड़ित 70 से 80 मरीज रोजाना आ रहे हैं।
बारिश में आई नमी से खांसी-जुकाम व बुखार के रोगियों की संख्या में इजाफा हर रोज दर्ज किया जा रहा है। इस समय इन बीमारियों के नागरिक अस्पताल में रोजाना सैकड़ों मरीज आ रहे हैं। इसके साथ ही बारिश के कारण एक और बीमारी ने जोर पकड़ा है, जिसे मेडिकल साइंस में टीनिया नाम दिया गया है। इस बीमारी से मरीजों के शरीर पर लाल रंग के दाद किस्म के स्पॉट हो जाते हैं। फंगस किस्म की यह बीमारी बारिश के गंदे पानी से होती है। अस्पताल में चर्म रोग के करीब 250 मरीज रोजाना आ रहे हैं, जिनमें से 70 से 80 मरीज टीनिया नामक बीमारी से ग्रस्त हैं।
एक से दूसरे को लगने वाली है यह बीमारी
मेडिकल साइंस में इस बीमारी को कम्युनिकेबल (प्रेषणीय) अर्थात एक से दूसरे मरीज को होने वाली बीमारी बताया गया है। बीमारी से ग्रस्त रोगी को जहां अपना बचाव करना होता है, वहीं दूसरों को भी बचाना होता है। दूसरों को बचाने के लिए विशेषतौर पर उससे अपने कपड़े बचाने होते हैं। कपड़ों के संपर्क में आने से यह रोग दूसरे तक पहुंच जाता है।
अस्पताल में दी जा रही हैं दवाइयां
टीनिया के मरीजों के लिए अस्पताल में दवाइयां मौजूद हैं। मरीजों को काट्रिमोख्सिल की ट्यूब, खाने के लिए हाड्रोख्सिल की गोलियां व पेट के कीड़े मारने की एलबेंडाजोल की गोली दी जा रही है। पेट में कीड़े होने पर भी इस बीमारी के होने की आशंका जताई गई है।
बारिश में गंदगी होने से अकसर यह बीमारी होती है। बीमारी से बचने के लिए शरीर की सफाई रखना जरूरी है। बीमारी होने पर मरीज को अपने कपड़े अलग से गर्म पानी में धोने चाहिए और दूसरों के कपड़ों का उपयोग नहीं करा चाहिए। कपड़ों को पहनने से पहले प्रेस जरूर कर लेना चाहिए। समय पर दवाइयों का प्रयोग करना चाहिए।
डॉ. मनोज यादव, चर्म रोग विशेषज्ञ नागरिक अस्पताल।