रेवाड़ी। डिपो को हाल ही में कैथल से 10 नई बसें मिली हैं। इसके साथ ही डिपो के पास कुल 144 बसें हो गई हैं। इनमें 35 बसें किलोमीटर स्कीम की तथा 109 रोडवेज की हैं। लेकिन अभी भी 33 बसों की जरूरत है। इन बसों के मिलने के बाद बसों का बेड़ा पूरा हो जाएगा। डिपो को कुल 177 बसों की स्वीकृति है। बसों की पूर्ति न होने से महेन्द्रगढ़, नारनौल, रोहतक, झज्जर, दिल्ली, चंडीगढ़ व जयपुर समेत कई रूट के फेरे प्रभावित हो रहे हैं। अभी तक की बसों के लिए 140 ड्राइवर और 200 कंडक्टर की व्यवस्था है, मगर जरूरत 180 ड्राइवर और 240 कंडक्टरों की है। यानी जरूरत पूरी करने के लिए रोडवेज को अभी 40 ड्राइवर और 40 कंडक्टर चाहिए। रेवाड़ी में रोजाना बसों से करीब 20 हजार के आसपास यात्री सफर करते हैं। त्योहारी सीजन में यह आंकड़ा 30 हजार के आसपास पहुंच जाता है। करीब 12 लाख रुपये का राजस्व होता है।
इस साल इलेक्ट्रिक बसों के मिलने की उम्मीद
रेवाड़ी डिपो को 50 इलेक्ट्रिक बसें मिलेंगी। करीब 13.94 करोड़ रुपये की लागत से चार्जिंग स्टेशन बनवाया जाएगा। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उम्मीद है कि इस साल नई इलेक्ट्रिक बसें मिल जाएंगी।
नई बसों में ड्राइवर और कंडक्टर की कमी
रोडवेज को हाल ही में 10 नई बसें मिली हैं, जो कैथल डिपो से मंगाई गई हैं। निदेशालय ने इन बसों को तो भेज दिया, लेकिन इनके साथ में ड्राइवर और कंडक्टर नहीं भेजे गए। रोडवेज के कर्मचारियों के मुताबिक डिपो में पहले से ही ड्राइवर और कंडक्टर की कमी है, लेकिन इसके बावजूद नई बसों के साथ नए ड्राइवर न भेजने से और ज्यादा परेशानी खड़ी हो गई हैं।
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निदेशालय की ओर से जल्द नए ड्राइवर और कंडक्टर भेजे जाने की उम्मीद है। मांग की गई है। -कृष्ण चंद, डीआई, रोडवेज रेवाड़ी।