सितम ढाने वाली गर्मी से बेहाल मरीज कोसों दूर से नागरिक अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन यहां पहुंचने वाली मरीजों को तीन दिन तक चक्कर लगाने के बाद भी डॉक्टर नसीब नहीं पर उपचार के लिए लोगों को यह कहते सुना गया कि अस्पताल ही वेंटिलेटर पर है तो बीमारी को इलाज कैसे होगा। इधर दम निकालने वाली गर्मी से परेशान एक डॉक्टर ने तो बुधवार को ओपीडी ही अपने रूम से बाहर लगाई।
आलम यह था कि रेफर केस को भी तीन घंटे तक इंतजार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा था। वहीं अस्पताल के तीन फिजीशियन में से एक भी अपनी जगह पर नहीं मिला। इसके चलते मरीजों में काफी रोष रहा। यहां पर आए मरीजों से जब बात की गई तो सभी ने नागरिक अस्पताल प्रशासन पर अपनी भड़ास निकाली। गौरतलब है कि पिछले तीन दिनों में नागरिक अस्पताल की ओपीडी एक हजार से बढ़कर बुधवार को 1278 पर पहुंच गई।
ओपीडी का भार आधा फिजिशयन एवं चर्म रोग विशेषज्ञों पर
शहर के नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन औसतन एक हजार ओपीड़ी होती है, लेकिन बीते दिनों में पच्चीस फीसदी तक बढ़त होने के कारण हालात बेकाबू हो गए हैं। कुल ओपीडी में से पचास फीसदी मरीज फिजिशियन एवं चर्म रोग से जुड़े हुए होते हैं। यही कारण है कि इन डॉक्टरों के रूम के बाहर लंबी लाईनें लगी रहती हैं। इसे देखते हुए अस्पताल प्रशासन की ओर से ओपीडी के लिए तीन फिजिशयन एवं चर्म रोग के लिए एक विशेषज्ञ डॉक्टर को नियुक्त किया हुआ है।
मौके पर तीन में से एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं था ओपीडी में
फिजिशियन डॉक्टरों के रूम के बाहर सैकड़ों लोगों की भीड़, लेकिन यहां पर मौजूद एक भी कुर्सी पर डॉक्टर मौजूद नहीं था। बुखार से पीड़ित पैंतीस किमी दूर से बुखार से पीड़ित अपने बच्चें को लेकर आई झाबुआ निवासी महिला नीलम ने बताया कि वह छह जून से आ रही है, लेकिन यहां पर डॉक्टर नहीं मिलने के कारण उसे वापस लौटना पड़ रहा है। उसने कहा कि वह सुबह दस बजे से यहां पर बैठी हुई है, लेकिन कोई भी डॉक्टर यहां पर एक ही डॉक्टर मौजूद था, वह भी चला गया है। मुक्तिवाड़ा निवासी खेमचंद ने बताया कि वह दो घंटे से डॉक्टर के इंतजार में बैठा हुआ है, यहां पर एक डॉक्टर मौजूद था, वह भी भीड़ देखकर दो घंटे से गायब है।
रेफर केस को भी करना पड़ रहा है घंटो इंतजार
हृदय रोग से परेशान नारनौल निवासी को नारनौल सिविल अस्पताल ने रेवाड़ी के लिए रेफर किया था, लेकिन यहां ट्रॉमा सेंटर पहुंचने पर उसे नागरिक अस्पताल में जाने के लिए कहा गया। यहां पर वह सुबह दस बजे आ गया था, लेकिन एक ही डॉक्टर होने के कारण उसका डेढ़ बजे तक नंबर नहीं आया। सुभाष ने कहा कि एक ओर सरकार अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं का दावा कर रही है, वहीं डॉक्टरों का रवैया उनकी नीति को पलीता लगा रहा है।
महज दो कूलरों के सहारे ओपीडी के हजारों मरीज
नागरिक अस्पताल में हजारों मरीज प्रतिदिन अपने उपचार के लिए यहां पर आते हैं। लेकिन इन मरीजों को अपनी बारी का इंतजार करने के लिए यहां पर घंटो इंतजार करना पड़ता है। इन हजारों मरीजों को गर्मी से बचाने के लिए अस्पताल प्रशासन की ओर से महज दो कूलर लगाए गए हैं,जो कि महज खाना-पूर्ति शामिल हो रहे हैं। यहां पर गर्मी से बदहाल मरीजों को अखबारों से हवा करते देखा जा सकता है।
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वर्जन-
बुधवार को केवल मेडिकल की ओपीडी 450 थी। तीन में से एक डॉक्टर छुट्टी होने के कारण थोड़ी परेशानी जरूर हुई है। इधर नई बिल्डिंग का काम शुरू होने के बाद गर्मी सहित अन्य समस्याओं के मरीजों को राहत मिल जाएगी।
-डॉ. सुदर्शन पंवार, अधीक्षक नागरिक अस्पताल