रेवाड़ी। शहर के ऐतिहासिक भाड़ावास गेट के जीर्णोद्धार का काम सोमवार रात को शुरू करा दिया गया है। इससे गेट की ऐतिहासिकता बनी रहेगी। 25 अगस्त की रात को भाडावास गेट को गिराने की तैयारी कर ली गई थी।
शहर का ऐतिहासिक भाड़ावास गेट करीब 400 वर्ष पुराना है। 21 अगस्त को भाड़ावास गेट का एक हिस्सा टूटकर गिर गया था। इस दौरान इधर से बाइक से गुजर रहे गांव कनुका निवासी सुभाष चंद्र इसकी चपेट में आ गए थे। इससे उनकी मौत हो गई थी। हादसे के बाद भाड़ावास गेट को बंद कर दिया गया था।
गेट को बंद किए जाने के कारण आम रास्ता बंद हो गया था। गेट के नीचे से ही शहर के बाजारों की ओर रास्ता जाता है। गेट बंद रहने के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। इससे लोगों में रोष बढ़ गया है। दुकानदारों ने इसको लेकर मोर्चा खोल दिया था। 25 अगस्त की रात को भाड़ावास गेट को गिराने की तैयारी कर ली गई थी। चार जेसीबी भी मौके पर बुला ली गई थी, लेकिन बिना किसी जांच पड़ताल के इस ऐतिहासिक गेट को गिराने पर सवाल खड़े हो गए थे। बाद में प्रशासन ने गेट गिराने का काम रोक दिया था।
उपायुक्त राहुल हुड्डा की ओर से तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया था। एसडीएम होशियार सिंह के नेतृत्व में लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता आदित्य देशवाल और जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता विनय प्रकाश चौहान की टीम ने भाड़ावास गेट का निरीक्षण किया और इसके इतिहास से संबंधित कागजात खंगाले। जांच कमेटी ने करीब सप्ताह भर पूर्व मामले में रिपोर्ट दी थी कि भाड़ावास गेट को नहीं तोड़ा जाए। यह शहर का ऐतिहासिक गेट है। इसका जीर्णोद्धार संभव है।