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#हिंदीहैंहमः हिंदी है हमारी जान, इसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाई हमारी पहचान, जारी रहे प्रचार प्रसार

Thu, 27 Aug 2020 02:35 PM IST
रोहतक ब्यूरो अमर उजाला, रेवाड़ी
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Hindi Hai Hum - फोटो : अमर उजाला
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हिंदी ने पूरे भारत देश को एक सूत्र में बांधा है और आज हिंदी देश की पहचान है। भारत आज विश्व के सामने संभावना भरा बाजार समिति हैं। ऐसे में जल्द ही हिंदी अंतर्राष्ट्रीय भाषा बनने जा रही हैं। यह कहना है शिक्षाविदों का उन्होंने हिंदी के लिए अमर उजाला की ओर से शुरू की गई मुहिम से अधिक से अधिक संख्या में जोड़ने का आह्वान किया है।
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हिंदी भाषा को देवनागरी लिपि में भारत की कार्यकारी और राजभाषा का दर्जा अधिकारिक रूप से दिया गया है। हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा ही नहीं बल्कि भारतवासियों की पहचान भी है। आज के आधुनिक युग में हमें अंग्रेजी भाषा भी सीखनी जरूरी है, लेकिन हमें अपनी मातृभाषा हिंदी को कभी नहीं भूलना चाहिए। हमें हिंदी हैं हम वतन के नारे का सम्मान करना चाहिए।

हिंदी हमारे राष्ट्र की पहचान है। हम हिंदी बोल तो रहे हैं मगर इसका स्वरूप नहीं समझ पा रहे हैं। हिंदी हमारी संस्कृति है। इससे समाज का उत्थान और विकास हुआ है। हिंदी भारतवर्ष को एकता के सूत्र में बांधने में अहम भूमिका अदा कर रही है। अमर उजाला फाउंडेशन ने इस अभियान की पहल की है। सभी नागरिकों को मिलकर इस अभियान से जुड़ना चाहिए और हिंदी के विकास में अपना योगदान देना चाहिए।
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- उगेश कुमारी, हिंदी प्राध्यापिका राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल नाहड़

वर्तमान विश्व की परिस्थितियों को देखते हुए हिंदी भाषा अंतरराष्ट्रीय आवश्यकता बनती जा रही है। वर्तमान समय में भारत के अलावा करीब 39 विश्वविद्यालयों में हिंदी भाषा पढ़ाई जा रही है, जो कि हिंदी के विकास के लिए अहम भूमिका अदा कर रहे है। राष्ट्रीय स्तर पर भी नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक संस्थाएं हिंदी के लिए प्रचार-प्रसार कर रही हैं। इससे लोगों में हिंदी के प्रति जागरूकता आ रही है।
- कमल शर्मा, हिंदी प्राध्यापक राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल झाड़ौदा

वर्तमान समय में हिंदी भाषा का सम्मान हो रहा है। आगामी समय में हिंदी भाषा का भविष्य उज्ज्वल है। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए इसका अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करना जरूरी है। वर्तमान समय में बड़ी-बड़ी कंपनियों के विज्ञापन हिंदी भाषा में प्रकाशित किए जा रहे हैं, जो सराहनीय हैं। अमर उजाला का हिंदी है हम अभियान नागरिकों को जागरूक करने में अहम भूमिका अदा करेगा।
- जितेंद्र, प्राध्यापक, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल जाटूसाना

वर्तमान समय में हिंदी का सही अर्थों में प्रयोग नहीं किया जा रहा। बचपन से ही लोग अपने बच्चों को अंग्रेजी भाषा बोलना सिखाने लग जाते हैं। हिंदी का प्रयोग करने में संकोच महसूस करते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक से लेकर विद्यार्थी तक सभी हिंदी बोलने से बचते हैं। वह फैशन के चक्कर में अंग्रेजी भाषा ही बोलते हैं।
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- राजेश देेवी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल जुड्डी
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