दो सौ बिस्तरों वाले नागरिक अस्पताल के महिला एवं प्रसूति विभाग में रात के समय निजी अस्पतालों के भरोसे चल रहा है। इसका बड़ा कारण है कि रात के समय पर महिला विशेषज्ञ डॉक्टर की उपलब्धता नहीं होना है। रात में डॉक्टर बुलाने की बजाय निजी अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विभागों की ओर से रात के समय ऑन कॉल डॉक्टर उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कहीं अलग है।
जिले के 13 प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) व 5 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की ओर से ऑपरेशन से डिलीवरी करने के केस नागरिक अस्पताल में रेफर किया जाते हैं, क्योंकि इन स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ महिला चिकित्सक नही हैं। जनवरी माह में नागरिक अस्पताल में 507 सामान्य 109 से ज्यादा सीजेरियन डिलीवरी हुई। अर्थात नागरिक अस्पताल में हर रोज तीन से अधिक सीजेरियन डिलीवरी हो रही है। लेकिन ये अधिकतर डिलीवरी दिन के समय ही होती हैं।
विभाग की मुखिया के भरोसे सीजेरियन डिलीवरी
महिला एवं प्रसूति विभाग में मुख्य रुप से एक ही विशेषज्ञ महिला चिकित्सक है। इसके अलावा अन्य महिला चिकित्सक सीजेरियन डिलीवरी नहीं करा सकती है। एसे में नागरिक अस्पताल का गायनी वार्ड विभाग की मुखिया व विशेषज्ञ के भरोसे ही चल रहा है। डॉक्टरों की कमी के कारण ऑपरेशन थिएटर में सिर्फ दोपहर दो बजे तक ऑपरेशन होते हैं। रात में आने वाले मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।
सहायक स्टाफ निजी अस्पतालों मरीजों को करते हैं रेफर
जानकारी के अनुसार जनवरी माह में नागरिक अस्पताल में रात के समय सीजेरियन के 50 से अधिक केस रैफर कर दिए गए। जानकारों ने बताया कि यदि मौजूद पैरामेडिकल महिलाओं को तबीयत खराब होने का डर दिखाकर निजी अस्पतालों में जाने के लिए प्रेरित करते हैं। बताया यह भी जा रहा है कि सरकारी अस्पताल से केस रैफर करने पर निजी अस्पतालों की ओर से सहायक स्टाफ को कमीशन भी दिया जाता है।
प्रश्िािक्षत स्टाफ नर्स की कमी
नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों से ज्यादा रोगियों के स्वास्थ्य लाभ की जिम्मेदारी स्टाफ नर्स पर होती है। अस्पताल में इसके लिए 37 पोस्ट प्रस्तावित हैं लेकिन यहां पर 17 पोस्ट पर ही नर्स काम कर रही हैं। 17 में से दो से तीन घरेलू कारणों के चलते छुट्टी पर रहती हैं। ऐसे में पूरे अस्पताल की जिम्मेदारी महज 15 नर्सों पर रहती है।
रात में अल्ट्रासाउंड की नहीं है व्यवस्था
नागरिक अस्पताल में एक्स-रे कराने के लिए एक सप्ताह तक के लिए मरीजों को समय दिया जाता हच्। पर्याप्त रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण मरीज डॉक्टरों के साथ प्रतिदिन भिड़ते देखे जा सकते हैं। गर्भवती महिलाओं के केस में कई बार चिकित्सकों को अल्ट्रासाउंड भी करना पड़ता है, लेकिन संसाधनों के अभाव में लोगों के पास परेशानी झेलने के अलावा कोई उपचार नही है।
रेफर करने वालों पर होगी कार्रवाई: डॉ. थापर
नागरिक अस्पताल के एसएमओ डॉ सर्वजीत थापर ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टर पूरे हैं। दो महिला विशेषज्ञ चिकित्सक एनएचएम के तहत नियुक्त किए गए हैं। रात के समय डॉक्टर को ऑन कॉल बुलाया जाता है। मामले की जांच कर रैफर करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।