रेवाड़ी। मॉडल टाउन स्थित बालभवन में सोमवार को आयोजित दिव्यांग शिविर में भारी अव्यवस्थाएं दिखीं। दूर-दूर से आए दिव्यांगों की पूरे दिन परेशान रहे। दिव्यांगों को भूखे-प्यासे घंटों लाइन में खड़ा कराया गया। इसमें दिव्यांग बैसाखी, लकड़ी और परिजनों का सहारा लेकर जैसे-तैसे खड़े रहे, जो दिव्यांग ठीक से चल तक नहीं पाते, वे नीचे बैठे रहे। इससे लोगों में आक्रोश देखा गया। इधर अधिकारी पूरा नजारा देखते रहे, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं बनाई। 10 से 20 किलोमीटर दूर से आए अनेक दिव्यांगों को बिना साइकिल या अन्य उपकरण लिए ही वापस लौटना पड़ा। जबकि इन्हें सूचना देकर यहां बुलाया गया था।
वाहनों से शिविर स्थल तक नियमानुसार पैरों से विकलांग लोगों को ट्रायसिकिल पर पहुंचाया जाना था, लेकिन अव्यवस्थाओं का आलम यह था कि ऐसे विकलांगों की कोई सुध लेने वाला ही नही था। कई विकलांग भरी धूप में गिट्टी वाली सडक से घिसटते हुए शिविर स्थल तक पहुंचे। शिविर में विकलांगों को कोई जानकारी देने वाला भी मौजूद नही था, जिससे दिव्यांग इधर-उधर असमंजस की स्थिति में भटकते रहे। इसके अलावा अनेक दिव्यांगों को पूरे उपकरण भी नहीं दिए गए।
दोपहर बाद रेडक्रास सचिव ने शिविर में घूमकर दिव्यांगों का हाल जाना। कुछ लोगों की उन्होंने समस्याएं भी हल कराई। दर्जनों दिव्यांगों की शिकायत थी कि उन्हें सूचना देकर यहां बुला लिया, लेकिन अब उन्हें टरकाया जा रहा है। जबकि वे 20 किलोमीटर से अधिक दूरी से यहां पहुंचें है। दिव्यांगों ने कहा कि वे इधर-उधर भटक रहे हैं लेकिन कोई उनकी मदद करने वाला ही नहीं है।
क्या बोले दिव्यांग
वह ट्राईसाइकिल लेने के लिए आया था, लेकिन उसे बैटरी नहीं दी गई। बेल्ट भी नहीं दिया जा रहा है। शिकायत के बाद भी कोई सुनने वाला ही नहीं है।
-कृष्ण कुमार ढलियावास
बेटे के लिए साइकिल लेने आई थी। सूचना देकर बुलाया था, लेकिन अब बाद में आने को कह रहेे हैं। करीब 20 किलोमीटर दूर से शिविर में पहुंची हूं। शिविर में काफी उम्मीद से आई थी।
-हंसराज जैनाबाद उषा देवी
सुबह से उपकरण लेने के लिए खड़ा हूं, लेकिन कोई सुनने वाला ही नहीं है। दोपहर बाद सचिव साहब आए थे। उसके बाद उनकी समस्या का समाधान हुआ। शिविर के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है।
-बालकिशन दखोरा
15 किलोमीटर दूर से आया हूं। शिविर में आने के लिए सूचना दी गई थी, लेकिन यहां आने के बाद बताया गया कि उसे उपकरण नहीं मिलेंगे। अधिकारियों से भी मुलाकात की गई है, लेकिन अब खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है।
-मानसिंह इब्राहिमपुर
----
वर्जन
जिन्हें बुलाया गया था, उन्हें उपकरण दे दिए गए हैं। शिविर दिव्यांगों की मदद के लिए है, न कि परेशानी के लिए।
-मनोरंजन शर्मा, सचिव रेडक्रास रेवाड़ी