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संक्रमण के दबाव में चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ का अभाव झेल रहा हेल्थ सिस्टम

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सामान्य दिनों में जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं को चलाने के लिए चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ व अन्य कर्मियों की कमी झेल रहा हेल्थ सिस्टम तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण के चलते दबाव में दिख रहा है। बीते 10 दिनों में सात डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ के अलावा सीएमओ ऑफिस में तीन क्लर्क संक्रमित पाए जा चुके हैं। 200 बेड वाले नागरिक अस्पताल की जरूरत तो दूर, 100 बेड के लिए जरूरी स्टाफ तक उपलब्ध नहीं है। अब अधिकारियों के सामने 24 घंटे कोरोना वार्ड चलाने के लिए ओपीडी बंद करने व अन्य सेवाओं को समिति करने पर मंथन चल रहा है। सोमवार को इस पर फैसला भी हो सकता है।
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नागरिक अस्पताल में 100 बेड के हिसाब से 55 डॉक्टर, 48 स्टाफ नर्स व 9 नर्सिंग सिस्टर की पोस्ट चार साल में स्वास्थ्य विभाग नहीं भर पाया। नागरिक अस्पताल में 47 डॉक्टर कार्यरत हैं, इनमें से सात पॉजिटिव पाए जा चुके हैं। संख्या घटकर 40 रह गई है। अर्थात सीधे 15 डॉक्टर की कमी है। स्वास्थ्य विभाग में रीढ़ की हड्डी कही जाने वाली स्टाफ नर्स 20 पोस्ट खाली हैं, कार्यरत महज 18 ही हैं। 5 मई 2019 को स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पताल को 100 से बढ़ाकर 200 बेड करने की घोषणा की गई थी। लेकिन संसांधनों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई।
200 बेड के लिए जरूरी 110 डॉक्टर और 180 स्टाफ नर्स
स्वास्थ्य सेवाओं में डॉक्टर के बाद स्टाफ नर्स नींव होती हैं। लेकिन रेवाड़ी में पहले से ही नींव हिली हुई है। 200 बेड के अस्पताल के लिए स्टाफ नर्स की प्रस्तावित पोस्ट बढ़कर 180 व डॉक्टर की 110 हो जाएंगी। लेकिन ऐसा कब होगा ये बड़ा सवाल है। ऐसा ही हाल नर्सिंग सिस्टर का है। यहां पर इनके लिए 10 पोस्ट प्रस्तावित है, लेकिन कार्यरत महज दो हैं। ऐसे में 8 पोस्ट खाली होने का खामियाजा यहां पर भर्ती मरीजों को उठाना पड़ रहा है।
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सामान्य दिनों में औसतन 1500 की होती है ओपीडी
शहर के नागरिक अस्पताल में हर रोज औसतन नए और पुराने 1500 मरीजों की ओपीडी होती है। नागरिक अस्पताल में दवाओं की कमी से मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ती है। गर्मी बढ़ते ही डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ने लगती है। लेकिन कईं बार इन मरीजों को भी पूरी दवाएं नहीं मिल पाती हैं। शूगर व बीपी के मरीजों को भी बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।
ट्रॉमा सेंटर भी महज रेफरल सेंटर
जिला से तीन नेशनल हाईवे- 48, 11 व 71 होकर गुजरते हैं। पटौदी रोड को भी हाईवे में तब्दील करने पर कार्य चल रहा है। ऐसे में सड़क दुर्घटनाओं के हर रोज शहर के ट्रॉमा सेंटर में 10-12 केस पहुंचते हैं। ट्रॉमा सेंटर में व्यवस्थाएं नहीं होने से हर रोज 80 फीसदी घायलों को रेफर कर दिया जाता है। इसका बड़ा कारण यह है कि आज तक ट्रॉमा सेंटर में स्थायी चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं हो पाई है। नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों की ड्यूटी ही ट्रॉमा सेंटर में लगाई जाती है।
करीब 7 चिकित्सक कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं, कोरोना वार्ड चलाने के लिए 24 घंटे चिकित्सकों की नियुक्ति की जाती है। ऐसे में ओपीडी चलाना मुश्किल हो रहा है, इसको लेकर सोमवार को फैसला लिया जाएगा। उपलब्ध संसाधनों से चिकित्सक बिना डरे व थके स्वास्थ्य कर्मी बेहतर सेवाएं दे रहे हैं।
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डॉ. सर्वजीत थापर, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, नागरिक अस्पताल।
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