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कलर बेड़शीट प्लान ने छह दिन में तोड़ा दम

Sun, 25 Dec 2016 11:27 PM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
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अस्‍पताल में बेड पर ‌ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शहर के नागरिक अस्पताल में मंगलवार से शुरू हुई कलर बेडशीट योजना ने महज छह दिन में ही दम तोड़ दिया है। यहां कई जगह तो पांच दिन पहले बिछाई गई बैंगनी रंग की चादर भी नहीं बदली गई। जानकारी के अनुसार प्रदेश सरकार की ओर से अस्पताल में प्रतिदिन बेडशीट बदलने के लिए पिछले दिनों एक योजना शुरू की।
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जिसमें प्रदेश के सभी अस्पतालों में हर दिन नए रंग की बेडशीट बिछाने के आदेश दिए गए। जिले में 20 दिसंबर को सीएमओ डॉ. बीके राजौरा ने नागरिक अस्पताल में इस योजना का शुभारंभ किया। योजना के मुताबिक रविवार को पीच (चीकू) कलर की चादर बिछाई जानी थी, लेकिन यहां पर पीले रंग की चादर बिछी हुई थी। वहीं कुछ बेड पर तो हालात यह थे कि बैंगनी रंग की चादर ही बिछी मिली। इसके अलावा अस्पताल में महिलाओं के शौचालय की व्यवस्था दुरुस्त न होने से मरीजों में नाराजगी है।

आदेश के बावजूद कर्मचारी पुराने ढर्रे पर
नागरिक अस्पताल में बेडशीट नहीं बदलने के लिए जब स्टॉफ नर्स से बात की गई तो उन्होंने सीधा जवाब दिया।  यहां पर कोई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं है,ऐसे में कौन बेडशीट बदलेगा। योजना को शुरू करने का मूल उद्देश्य ही कर्मचारियों की मनमानी पर रोक लगाना था। मरीज एवं तीमारदारों की शिकायत रहती थी कि चार-चार दिन में बेडशीट नहीं बदली जाती, वहीं कर्मचारी प्रतिदिन बेडशीट बदलने का दावा करते थे। कलर फुल बेडशीट योजना शुरू करने से व्यवस्था बदलने के दावे की पड़ताल की गई तो उसमें पहले जैसे ही हालात मिले।
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सीपीएस लगा चुके हैं फटकार
पिछले बुधवार को मुख्यमंत्री के आदेश पर मुख्य संसदीय सचिव श्याम सिंह राणा सरकारी संस्थाओं एवं कार्यों की प्रगति के निरीक्षण के लिए रेवाड़ी पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान सीएमओ सेक्टर-चार स्थित डिस्पेंसरी पहुंचे तो यहां पर पुरानी चादर मिलने पर उन्होंने कर्मचारियों को फटकार लगाई। जबकि सीएमओ जिले में 5040 कलर बेडशीट मिलने का दावा कर चुके हैं। यहीं हाल बावल जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों का है। महज कुछ बेड पर बैडशीट बदलकर खानापूर्ति कर दी गई।

महिलाएं पुरुष शौचालय में जाने के मजबूर
नागरिक अस्पताल के प्रथम तल स्थित जनरल वार्ड में महिलाओं का शौचालय खराब होने के चलते उनको पुरुषों के शौचालय में जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। महिला मरीज एवं तीमारदारों का कहना है एक ही शौचालय होने के कारण शौचालय चोक हो चुका है। पानी की भी अच्छी व्यवस्था नहीं है। शौचालय सड़ रहे हैं,रविवार होने के कारण मरीजों के पास उच्च अधिकारियों की शिकायत करने की भी सुविधा नहीं है।
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मैं अस्पताल में पांच दिन से भर्ती हूं। रविवार को यहां पर कोई बेडशीट बदलने नहीं आया। हमें यह नहीं पता कि किस दिन किस रंग की चादरें बिछाई जाती हैं। इतना जरूर है कि यहां पर सुविधा नहीं है।
लक्ष्मण- मरीज
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अस्पताल में सफाई व्यवस्था अच्छी नहीं है। पुरुषों की टॉयलेट में महिलाएं जाने को मजबूर हैं। वह भी सड़ी हुईं हैं। चोक पड़ी हुई टॉयलेट में जाना मुश्किल हो रहा है। बेडशीट दो दिन जरूर बदली गई थी। इसके बाद नहीं बदली गई।
रमेश कुमार,भाड़ावास
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अस्पताल में बदहाली का आलम है। चादर बदलना तो दूर यहां पर सफाई व्यवस्था भी अच्छी नहीं है। बेडशीट चार्ट प्रत्येक वार्ड में होना चाहिए ताकि पता चल सके कौन से दिन कौनसी चादर बिछाई जानी है।
सुरेश कुमार, तीमारदार
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रविवार को किसी ने बेडशीट नहीं बदली। और न ही कोई सफाई करने आया। बदइंतजामी का आलम यह है कि कईं दिन से महिलाओं की खराब टॉयलेट को ठीक तक नहीं किया गया। हमें मजबूरी में पुरुष टॉयलेट मेें जाना पड़ रहा है।
-विद्या देवी, विजय नगर
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मामला अभी संज्ञान में आया है। अस्पतालों में प्रतिदिन बेडशीट बदलना जरूरी है। अगर आदेशों की पालना नहीं हो रही तो दिखवाया जाएगा। दोषी पर कार्रवाई की जाएगी।
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बीके राजौरा, सीएमओ, रेवाड़ी
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