रेवाड़ी। चीन में कहर बरपा रहे ओमिक्रोन के नए वैरिएंट को देखते हुए रेवाड़ी जिले में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को बचाने के लिए सभी तैयारियां पूरी की गई हैं, लेकिन लोग अभी लापरवाह बने हुए हैं। जिले भर में न तो सोशल डिस्टेंस का पालन हो रहा है और न ही लोग मास्क का प्रयोग कर रहे हैं। यदि लोगों की लापरवाही ऐसे ही चलती रही तो आने वाले दिनों में ओमिक्रोन का खतरा बढ़ सकता है। बता दें उड़ीसा और महाराष्ट्र में बीएफ-7 वैरिएंट के केस मिलने के बाद इन राज्यों से शहर में आने वाले लोगों की निगरानी भी शुरू कर दी है। इसके साथ ही गुजरात और दिल्ली से आने वाले यात्रियों पर भी नजर रखी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि बाहरी राज्यों से किसी व्यक्ति के आने और उसमें जुकाम, बुखार आदि के लक्षण होने पर उसकी सूचना विभाग को दें। ऐसा व्यक्ति खुद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर सकता है। उसकी सैंपलिंग करवाकर जीनोम सीक्वेंसिंग कराई जाएगी। जिले में अब तक कोरोना के 24991 संक्रमित मिल चुके हैं। इनमें 24729 मरीज ठीक हो चुके हैं और 261 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से वीरवार को 85 लोगों के सैंपल लिए गए हैं, जिनकी रिपोर्ट आनी बाकी है।
सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मरीजों के लिए ऑक्सीजन के एक-एक सिलिंडर के लिए मारामारी थी। उस दौर को देखते हुए पिछले साल स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पतालों में ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था कर ली गई थी। जुलाई 2021 में 500 एलपीएम के ऑक्सीजन प्लांट का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने किया था। इसके अलावा पीएम केयर फंड की मदद से 1000 एलपीएम का दूसरा प्लांट लगाया गया था। इसके अतिरिक्त बावल व कोसली में 250-250 एलपीएम क्षमता के प्लांट बनकर तैयार हो चुके हैं।
बेड और वार्ड की भी है व्यवस्था
तीसरी लहर के कारण सारा सिस्टम अस्त-व्यस्त हो गया था, जिससे सीख लेकर भविष्य में कोरोना की चुनौतियों का सामना करने के लिए पहले से ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से पर्याप्त प्रबंध कर लिए गए हैं। बीएफ-7 वैरिएंट को देखते हुए बेड व वार्ड की व्यवस्था कर ली गई है। इसके आलवा 18 आईसीयू बेड हैं जिनमें से छह बच्चों के लिए और 12 वयस्कों के लिए उपलब्ध है।
एंबुलेंस की व्यवस्था, लेकिन स्टाफ की कमी
स्वास्थ्य विभाग के पास 29 एंबुलेंस हैं, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण एंबुलेंस पूरी नहीं चल पाती हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास छह एएलएस यानी एडवांस लाइफ सर्पोट, छह बीएलएस बेसिक लाइफ सर्पोट, 17 पीटीए, पेशेंट ट्रांसफर एंबुलेंस, एक बैक होम एंबुलेंस जिसमें नवजात शिशु व परिजनों को उनके घर तक छोड़ा जाता है। एक कोविड एंबुलेंस और दो मेडिकल मोबाइल यूनिट है जो धूल फांक रही हैं।
वैक्सीन अपडेट
लाभार्थी पहली डोज प्रतिशत दूसरी डोज प्रतिशत बूस्टर डोज प्रतिशत
हेल्थकेयर वर्कर 6688 101.30 6545 99.14 2683 40.64
फ्रंटलाइन वर्कर 8039 109.03 7735 105.05 2048 27.78
18 से 44 आयुवर्ग 490978 109.08 430154 95.57 29624 6.78
45 और इससे ऊपर 145210 96.79 131.306 87.52 17528 11.68
60 वर्ष से ऊपर 11612 111.59 99021 99.00 27348 27.34
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कुल लाभार्थी 700141
पहली डोज 762535 108.91 प्रतिशत
दूसरी डोज 675034 96.41 प्रतिशत
कुल डोज 1630577
पुरूषों को लगी वैक्सीन 850119
महिलाओं को लगी वैक्सीन 900675
हल्का बुखार, खांसी और कमजोरी हल्के लक्षण
स्वास्थ्य विभाग की ओर से बताया गया है कि हल्का बुखार, खांसी या कमजोरी महसूस होने को हल्के लक्षणों की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे मरीज चिकित्सक से परामर्श लेकर उपचार ले सकते हैं। यदि एंटीजन या आरटीपीसीआर रिपोर्ट पॉजिटिव है, लेकिन उसका ऑक्सीजन स्तर 93 प्रतिशत से अधिक है या फिर मरीज को बुखार नहीं है, सांस की तकलीफ नहीं है तो ऐसे मरीज घर पर आइसोलेट रह सकते हैं।
कोट
केंद्र सरकार की गाइडलाइन अभी नहीं आई है। फिर भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से बीएफ-07 वैरिएंट को लेकर व्यवस्था मजबूत बनाई गई है। जिले में चार ऑक्सीजन प्लांट हैं। बेड और वार्ड की व्यवस्था भी अलग से है। लोगों को भीड़-भाड़ वाले इलाके में जाने से बचना चाहिए। घर से बाहर निकलते समय मास्क लगाकर निकलना चाहिए। लोग सावधानी बरतेंगे तभी कोरोना को बढ़ने से रोका जा सकता है।
-डॉ. सुदर्शन पंवार, सिविल सर्जन, रेवाड़ी