रेवाड़ी। मलेरिया और डेंगू के मामले बढ़ने की संभावना को लेकर स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है। घरों में लार्वा मिलने पर नोटिस देना शुरू कर दिया है। साथ ही डेंगू और मलेरिया को लेकर नागरिक अस्पताल में विशेष वार्ड बनाने की तैयारी की जा रही है। विभाग की ओर से अभी तक 35 लोगों को नोटिस थमाया जा चुका है।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. अमित यादव के नेतृत्व में गठित टीमें जिला के ग्रामीण इलाकों में कूलर, गमलों, छोटे तालाब में लार्वा की जांच कर रही हैं। टीम में हेल्थ इंस्पेक्टर बिरेंद्र यादव और मलेरिया विभाग के सभी बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम के सदस्यों ने स्वास्थ्य केंद्रों में मलेरिया और डेंगू के संदिग्ध मरीजों की जांच भी शुरू कर दी है। वहीं अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों और तीमारदारों को उनके घरों के बाहर नालियों में कीटनाशक का छिड़काव करने और पानी जमा नहीं होने देने की सलाह दी जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने डेंगू और मलेरिया के प्रकोप से बचाने के लिए जिले के 141 तालाबों में गंबूजिया मच्छली डाली है। 15 तालाब शेष हैं। हेल्थ इंस्पेक्टर बिरेंद्र यादव ने बताया कि यह मछली लार्वा को खा जाती है। इससे मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया के मच्छर पैदा नहीं होने होते। एक मछली सौ से तीन सौ लार्वा को खा जाती है।
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सप्ताह में एक दिन शुष्क दिवस मनाने का आह्वान
स्वास्थ्य विभाग के स्वास्थ्य निरीक्षक विरेंद्र सिंह का कहना है कि पहले चरण में घरों में पानी की टंकियों, गमले, टायर और घरों के बाहर नालियों में मच्छरों के लार्वा की जांच की जा रही है। लोगों को सप्ताह में एक दिन सूखा दिवस मनाना चाहिए। लार्वा सात दिन में पनपते हैं। सप्ताह में एक दिन दो से तीन घंटे बर्तन, कूलर व गमले सूखा छोड़ते हैं तो मच्छरों के लार्वा नहीं पनप पाएंगे।
डेंगू के पांच साल के आंकड़े
जिले में वर्ष 2018 में डेंगू के 82, 2019 में 27, 2020 में 39 व वर्ष 2021 में 306, 2022 में 324, 2023 में 406 व इस वर्ष एक भी मरीज सामने नहीं आया हैं। इसी तरह मलेरिया के वर्ष 2018 में 13, वर्ष 2019 में 8, वर्ष 2020 में 2 और वर्ष 2021 में 1, 2022 में 3 और 2023 में 9 व इस वर्ष एक भी मामला सामने नहीं आया हैं।
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पिछले साल मिले थे 406 मरीज
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार पिछले वर्ष जिले में डेंगू के 406 केस सामने आए थे। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा था। इस बार विभाग ने पहले से ही तैयारी कर ली है। जिले में फाॅगिंग कराने को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने स्वास्थ्य केंद्रों में मलेरिया और डेंगू की जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। वहीं घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रही है।
नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने डेंगू और मलेरिया के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने और बरसात के मौसम में सावधानी बरतने की सलाह दी है। मलेरिया के लक्षण मच्छरों के काटने के 6 से 8 दिन बाद शुरू होते हैं। इसमें ठंड लगकर बुखार का आना और बुखार के ठीक होने पर पसीना आना, थकान, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, पेट की परेशानी, उल्टियां होना, बेहोशी आना, एनीमिया, त्वचा की पीली रंग की विकृति आदि लक्षण महसूस हो तो जांच कराना बेहतर है।
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वर्जन:
बारिश का मौसम आने से पहले स्वास्थ्य विभाग की टीमें जिले के विभिन्न गांवों में जाकर लोगों जागरूक कर रही है, जिससे कि आने वाले दिनों में लोग घरों में पानी को एकत्रित न होने दें। घरों में लार्वा मिलने पर अभी तक 35 लोगों को नोटिस थमाया जा चुका है।- डॉ. अमित यादव, नोडल अधिकारी, डेंगू एवं मलेरिया
रेवाड़ी। गांव गुगोढ़ में स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिए गए नोटिस को दिखाता बुजुर्ग। स्रोत: विभाग