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हवा-हवाई हुआ प्रदूषणरहित दीपावली का संदेश

Tue, 01 Nov 2016 12:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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 दीपावली का उत्साह और घी के दीपकों की रोशनी हमारी भारतीय संस्कृति की निशानी है, लेकिन इस पर्व पर जब से पटाखों जलाने की परंपरा शुरू हुई, तो त्योहार के मायने ही बदल गए। इस बार दीपावली पर अधिक से अधिक दीपक जलाने और पटाखों न खरीदकर प्रदूषणरहित दीपावली मनाने के जागरुकता अभियान चलने के बावजूद शहरवासियों ने लगभग दो करोड़ के पटाखों में आग लगा दी। जिला प्रशासन की ओर से हुडा ग्राउंड में लगे अस्थाई पटाखा मार्केट से ही लगभग दो करोड़ के पटाखों की बिक्री हुई है, जबकि अन्य जगहों पर हुई पटाखों की बिक्री का आंकड़ा अलग है। सूत्रों की मानें तो यहां दुकान लगाने वाले प्रत्येक व्यक्ति ने डेढ़ से ढाई लाख रुपए के पटाखे बेचे हैं। इसी प्रकार अवैध रूप से भी पटाखों की भारी बिक्री हुई है। शहर में एक दर्जन से अधिक जगह पटाखों के गोदाम बने हुए थे, जहां से लोगों ने सीधेतौर पर पटाखें खरीदे हैं। शहर के गली-मोहल्लों के दुकानदारों ने भी हजारों रुपए के पटाखों की बिक्री हुई है।
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स्कूलों में दिया संदेश, घर आकर चलाए पटाखे
जिला प्रशासन से लेकर स्कूल व शिक्षण संस्थानों में स्टाफ से लेकर सभी ने प्रदूषणरहित दीपावली मनाने के संदेश दिए, बाद में घर आकर खुद ही पटाखे चलाए। कुछ परिजनों ने खुद से बच्चों को पटाखे दिलाए, तो कुछ बच्चों की हठ के आगे कुछ न कर पाए। ऐसे में नुकसान प्रकृति और पर्यावरण का ही हुआ। दूसरी ओर जिला प्रशासन भी प्रदूषणरहित दीपावली को लेकर पटाखों पर सख्ताई से लेकर स्टालें बंद कराने तक कुछ नहीं कर पाया।

पटाखा बेच ग्राउंड में छोड़ गए गंदगी
कैसे न जले पटाखें, जब सैंकड़ों की तादात में आमलोग पटाखा बिक्री के लाइसेंस के लिए कतार में खड़े रहे। पटाखे बेचकर स्टाल संचालक पर्यावरण के साथ ग्राउंड भी गंदगी छोड़ चले गए। सोमवार सुबह सभी पटाखा विक्रेताओं ने अपनी स्टालें हटा ली, लेकिन उनकी स्टाल से ग्राउंड में फैले कूड़े, पटाखा वेस्ट व अन्य गंदगी को साफ करना अपना फर्ज नहीं समझा। 
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इस बार पिछले साल की तुलना में पटाखा स्टाल के लिए कम आवेदन आए थे। लेकिन पटाखों की बिक्री पर कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। मैंने तीन दिनों में लगभग 1 लाख 80 हजार रुपए के पटाखे बेचे हैं तथा 25 हजार रुपए के पटाखे स्टॉक में बचे हैं।
नरेंद्र कुमार, विजय नगर, पटाखा स्टाल संचालक
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दीपावली पर बच्चों में पटाखों को लेकर काफी उत्साह रहता है। शायद छोटे बच्चे पटाखों के दुष्परिणामों को कम समझते हैं। हम पटाखा स्टाल संचालक पटाखे इसीलिए बेचते हैं, क्योंकि लोग खरीदते हैं। यदि कोई खरीदेगा ही नहीं, तो स्टालें लगनी भी बंद हो जाएंगी। इस बार मैंने 2 लाख से अधिक के पटाखे बेचे हैं।  
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प्रवीण कुमार, शक्ति नपर, पटाखा स्टॉल संचालक
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