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Rewari News: होंद चिल्लड़ में शहीदों की स्मृति में गुरुवाणी का पाठ आज

Tue, 03 Feb 2026 12:50 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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रेवाड़ी। होंद चिल्लड़ एक ऐसा गांव है जिसका नाम 1984 के सिख नरसंहार की दर्दनाक यादों से जुड़ा है। यहां 42 वर्ष पूर्व हुई हिंसक घटना में 32 निर्दोष सिखों की हत्या कर दी गई थी। वर्षों बीत जाने के बाद भी आज तक पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिल पाया है। शहीदों की याद में 3 फरवरी को होंद चिल्लड़ गांव में गुरुवाणी का पाठ और अरदास का आयोजन किया जाएगा।
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यह कार्यक्रम सुबह 10 बजे होगा। पायल हलके से विधायक एवं होंद चिल्लड़ तालमेल कमेटी के प्रधान मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने कहा कि होंद चिल्लड़ की घटना केवल एक हिंसा नहीं थी, बल्कि मानवता को झकझोर देने वाली त्रासदी थी।
उन्होंने कहा कि दो साल के मासूम बच्चों और बुजुर्गों तक को बेरहमी से मार दिया गया लेकिन आज तक दोषियों को सजा नहीं मिल सकी।
उन्होंने यह भी कहा कि यह आयोजन केवल स्मरण का नहीं, बल्कि न्याय के लिए संघर्ष की निरंतरता का प्रतीक है। कार्यक्रम के माध्यम से पीड़ित परिवारों के दर्द और उनकी मांगों को समाज और शासन के समक्ष दोहराया जाएगा।
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मनविंदर सिंह के मुताबिक आजादी के बाद देश के बंटवारे का दंश झेल कर पाकिस्तान से आए सिखों के 16 परिवार होंद चिल्लड़ गांव में शांति से गुजर-बसर कर रहे थे। उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि पाकिस्तान से आकर अपने वतन में उन्हें कुछ ऐसा ही मंजर दोबारा देखना पड़ेगा। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए दंगों में गांव चिल्लड़ में खेतों में घर बनाकर रह रहे 32 सिखों की हत्या कर दी गई थी।


ऐसे हुआ था उजागर यह कांड

22 जनवरी 2011 को इंजीनियर मनविंद्र सिंह ने यह मामला उठाया। उन्होंने सोशल साइट पर मामले की डिटेल डाल दी। तब यह मामला उठा। मामला उठा तो फिर उठता ही चला गया। सिख फेडरेशन ने आवाज बुलंद की। आखिरकार सरकार ने इस कांड की जांच के लिए एक सदस्य कमेटी का गठन किया। जस्टिस रिटायर्ड टीपी गर्ग की एक सदस्य कमेटी गठित की। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट हरियाणा के सीएम को सौंप दी।




तीस दिन में रिपोर्ट देने का था संकल्प लगे 47 महीने

इस रिपोर्ट को 5 मार्च 2011 को 30 दिन में देने का संकल्प लिया गया था। सरकार ने कमिश्नर ऑफ इन्क्वायरी एक्ट 1952 के तहत 5 मार्च 2011 को राज्य सरकार ने जस्टिस टीपी गर्ग की अध्यक्षता में नवंबर 1984 में रेवाड़ी के गांव हौद-चिल्लर में सिख समुदाय के सदस्यों पर हुई हिंसा पर एक आयोग का गठन किया था। आयोग ने 273 याचिकाएं प्राप्त की, जिनमें इस घटना में 455 गवाहों के ब्यान दर्ज किए गए। रिपोर्ट फाइनल होते होते 47 माह लग गए।
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