धारूहेड़ा स्थित नगरपालिका कार्यालय।
धारूहेड़ा। औद्योगिक कस्बा में नगर पालिका की ओर से डेढ़ कनाल जमीन पर 200 बेड का अस्पताल बनेगा। नगर पालिका की ओर से तैयार प्रस्ताव को सहमति मिलने के बाद अस्पताल भवन के लिए धारूहेड़ा थाना के समीप डेढ़ कनाल जमीन भी चिह्नित की जा चुकी है। इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से मंजूरी मिल चुकी है। जल्द ही बजट भी जारी भी कर दिया जाएगा। इस अस्पताल के बनने से शहर के आसपास के लोग ही नहीं, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत श्रमिक लाभान्वित होंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि धारूहेड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या आठ पर स्थित है। राजमार्ग पर अस्पताल होना भी जरूरी है क्योंकि सड़क दुर्घटनाओं के गंभीर रूप से घायल होने वाले मरीजों को आपातकालीन की आवश्यकता होती है। बड़ा अस्पताल न होने के कारण रेवाड़ी या रोहतक रेफर किया जाता है। धारूहेड़ा से रेवाड़ी आने में करीब 40 से 50 मिनट या उससे ज्यादा का समय लग जाता है और जब रेवाड़ी नागरिक अस्पताल से किसी मरीज को रेफर किया जाता है तो रोहतक जाने में करीब दो घंटे या उससे ज्यादा का समय लग जाता है। ऐसे में तीन घंटे बर्बाद हो जाते हैं। अस्पताल बनने के बाद इन समस्याओं से निजात मिल जाएगी।
धारूहेड़ा की जनसंख्या करीब एक लाख के आसपास
धारूहेड़ा की जनसंख्या करीब एक लाख के आसपास है। यहां पर औद्योगिक क्षेत्र और झुग्गी झोपड़ियां बहुत हैं। राजस्थान सीमा के साथ अन्य राज्यों के काफी श्रमिक काम करते हैं। अस्पताल बनने का इंतजार लंबे समय से किया जा रहा है। फिलहाल अनुमति तो मिल चुकी है, अब बजट जारी होने के बाद आगे की प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी।
हजारों श्रमिकों को भी मिलेगा फायदा
धारूहेड़ा की छोटी-बड़ी करीब 65 औद्योगिक इकाइयों में 40 हजार से अधिक श्रमिक काम करते हैं। इस अस्पताल के बनने से बड़ा फायदा श्रमिकों को मिलेगा। इलाज के लिए गुरुग्राम और मानेसर में उपचार के लिए नहीं जाना पड़ेगा। मौजूदा समय में धारूहेड़ा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, सुविधाएं भी ठीक है। मगर अब आबादी भी काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में यह स्वास्थ्य केंद्र मौजूदा समय के लिए अनुकूल नहीं है। इसके लिए एक अस्पताल होना बहुत जरूरी है।
नगर पालिका की ओर से तैयार प्रस्ताव को सहमति मिल चुकी है। अस्पताल भवन के लिए धारूहेड़ा थाना के समीप डेढ़ कनाल जमीन भी चिह्नित की जा चुकी है।
कंवर सिंह, चेयरमैन, नगर पालिका धारूहेड़ा।