रेवाड़ी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका आंदोलन मामले का मंगलवार को पटाक्षेप हो गया। करीब 117 दिन चले इस मामले में दस दौर की बातचीत के बाद आखिर 4 अप्रैल को सरकार बैकफुट पर आ गई। इस दौरान सरकार ने सभी बर्खास्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बहाल करने पर सहमति जता दी है।
तालमेल कमेटी के प्रतिनिधि मंडल और विभागीय निदेशक हेमा शर्मा के साथ पंचकूला में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आंदोलन को लेकर बातचीत हुई, जिसमें यह अहम फैसला लिया गया। 8 अप्रैल को बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन का निर्णय लेने के बाद यह घटनाक्रम सामने आया है। विभाग ने दसवीं बार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं की तालमेल कमेटी को वार्ता के लिए पंचकूला बुलवाया था। बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त निदेशक राजबाला कटारिया भी शामिल हुईं।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल एडवोकेट कामरेड राजेंद्र सिंह ने आज बताया कि बैठक में निदेशक हेमा शर्मा ने प्रतिनिधिमंडल को अपने विभाग की ओर से सभी बर्खास्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं की सेवाएं बहाल करने और इनके साथ किसी भी तरह की प्रताड़ना कार्यवाही नहीं करने की बात कही। साथ ही उन्होंने गत 12 मार्च को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव वी. उमा शंकर की अध्यक्षता वाली बैठक में लंबित मांगों पर बनी आपसी सहमति को भी लागू करने का आश्वासन दिया। इस आश्वासन पर संयुक्त तालमेल कमेटी ने 8 दिसंबर से प्रदेश में चल रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं की हड़ताल को स्थगित करने का निर्णय लिया। इस कमेटी सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं से अपनी सेवा संभाल लेने की अपील की है। कमेटी ने विभाग की निदेशिका से यह उम्मीद भी जताई कि वे सहमति बन चुकी मांगों को जल्द लागू कराएंगी।
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जताई खुशी
- संघर्ष में उनका सहयोग और समर्थन करने वाले सभी संगठनों और व्यक्तियों का हम आभार जताते हैं। उम्मीद करते हैं कि विभाग अपने वादे पर खरा उतरेगा। साथ ही हमारी बहनों के मान-सम्मान को कायम रखेगा। विभाग की ओर से 164 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को सेवा से बर्खास्त किया गया था। सभी को बहाल कर दिया गया है। परियोजना अधिकारी कार्यालय में सभी को पदभार ग्रहण कराया गया।
-तारा देवी, जिला प्रधान आंगनबाड़ी यूनियन।
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कोट
सरकार की ओर से इस संबंध में आदेश पत्र मिलने पर उसका पालन किया जाएगा। दोनों पक्षों में हुई बातचीत पर सरकार की ओर से विभागीय निर्णय का पत्र जल्द आने की उम्मीद है।
- उर्मिल सिवाच, पीओ, महिला एवं बाल विकास विभाग।