स्कूल अपग्रेड होने की सूचना मिलते ही गोठड़ा-ठप्पा-डहीना गांव का जश्न का माहौल था। आसपास के गांवों के गणमान्य लोगों ने भी गांव पहुंचकर छात्राओं को बधाई दी। दोपहर बाद जैसे-जैसे सूचना फैलती गई लोगों की जुबान पर गोठड़ा-ठप्पा-डहीना का नाम आने लगा। स्कूल अपग्रेड की खबर के बाद गांव में डीसी डॉ. यश गर्ग, एसपी संगीता कालिया, जिला शिक्षा अधिकारी धर्मवीर बल्डोदिया, सीएमओ बीके राजौरा सहित अन्य अधिकारी भी पहुंच गए थे। इससे पहले सरकार की तरफ से स्कूल अपग्रेडेशन का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद सरकार के प्रतिनिधिमंडल के रूप में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष अरविंद यादव, जिलाध्यक्ष योगेंद्र पालीवाल, भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक सतीश खोला मौके पर पहुंचे। प्रतिनिधिमंडल ने छात्राओं को स्कूल अपग्रेड होने की जानकारी दी, लेकिन वे नहीं मानीं। छात्राओं का कहना था कि जब तक उनको स्कूल अपग्रेडेशन संबंधी पत्र नहीं मिल जाता तब तक अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगी। इसके बाद उपायुक्त डॉ. यश गर्ग स्कूल अपग्रेड करने संबंधी पत्र लेकर छात्राओं के पास पहुंचे। उन्होंने कहा कि शिक्षामंत्री ने छात्राओं की बात मान ली हैं। वीरवार से यहां प्राचार्य बैठने लगेंगे। इसके बाद छात्राओं ने अपना अनशन समाप्त किया।
छात्राओं का आंदोलन से जुड़ने लगे थे ग्रामीण
छात्राओं का अनशन दूसरे दिन भी जारी रहा। छात्राओं का समर्थन करने ग्रामीण भी अनशन स्थल पर पहुंचने लगे। कैप्टन अजय सिंह यादव ने भी अनशन स्थल पर पहुंचकर छात्राओं की मांग को जायज बताया। अगले दिन शनिवार को कोसली विधायक बिक्रम सिंह यादव, एसडीएम कुशल कटारिया और जिला शिक्षा अधिकारी धर्मबीर बल्डोदिया छात्राओं के बीच पहुंचे। अधिकारियों छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ने पर स्कूल अपग्रेड कराने का आश्वासन दिया, इसके बाद भी छात्राएं नहीं मानी। विधायक के आश्वासन के बाद भी छात्राओं की आंखों से आंसू निकल आए थे। इस दौरान एक छात्रा बेहोश भी हो गई थी। कुछ ग्रामीणों ने छात्राओं पर दबाव डालकर जूस पिलाने का भी प्रयास किया, इसके बाद भी वे अपने निर्णय पर अडिग रहीं।
यह रहा पूरा संघर्ष
गोठड़ा-ठप्पा-डहीना के राजकीय हाई स्कूल को अपग्रेड करने की मांग छात्राएं और ग्रामीण लंबे समय से कर रहे थे। छात्राओं का कहना था कि उन्हें 12वीं तक की पढ़ाई के लिए तीन किलोमीटर दूर कंवाली गांव जाना पड़ता है। सरकार की तरफ से उनकी मांग नहीं मानने पर छात्राएं स्कूल के बाहर अनशन पर बैठ गई। पहले दिन अनशन पर बैठी एक छात्रा बेहोश हो गई। इसके बाद उसको अस्पताल में भर्ती कराया गया। अनशन की जानकारी मिलते ही एसडीएम सहित अन्य अधिकारियों ने छात्राओं को समझाने का प्रयास किया लेकिन छात्राएं नहीं मानीं।
तीन छात्राओं की बिगड़ तबीयत
14 मई को अनशन पर बैठीं तीन और छात्राओं तन्नू, नेहा और मंजीत की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें उपचार के लिए रेवाड़ी के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। एसपी संगीता कालिया ने भी छात्राओं को कागज तैयार कराने के बाद मुख्यमंत्री से मिलवाने का आश्वासन दिया।
छात्राओं ने मांगा लिखित में सबूत
15 मई को शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा ने एक बयान जारी कर स्कूल को 12वीं तक करने की घोषणा की, लेकिन छात्राओं ने कहा कि जब तक उन्हें अपग्रेडेशन का लिखित में सबूत नहीं मिल जाता तब तक अनशन जारी रहेगा। इसी दिन छात्रा एकता, रेनू, रेखा और दो अन्य छात्राओं की भी तबीयत बिगड़ गई। उनको डहीना के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। बीएसएफ से बर्खास्त तेजबहादुर भी छात्राओं की मांग के समर्थन में उनके साथ अनशन पर बैठ गए। 16 मई को आक्रोशित छात्राओं ने स्कूल पर ताला जड़ दिया। इस दौरान चार और छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई।
छात्राओं की खुशी उनकी जुबानी
आखिर हमारे संघर्ष की जीत हो गई। सरकार ने हमारी मांग मानी। इसकी बेहद खुशी है। हम हमें पढ़ने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। - निलिता
यह हमारी नहीं पूरे गांव की जीत है। सभी ने इस संघर्ष में सहयोग दिया। इसके लिए धन्यवाद। सरकार ने हमारी मांग मानी इसके लिए उनको भी साधुवाद। -शीतल
हम ही जानते हैं कि 12वीं तक स्कूल नहीं होने के कारण कितनी परेशानी उठानी पड़ती थीं। कई छात्राओं को तो बीच में पढ़ाई तक छोड़नी पड़ जाती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। - सुजाता
मेरे पास इस खुशी को बयां करने के लिए शब्द नहीं है। मानों आज हमारी बहुत पुरानी मांग पूरी हो गई है। पूरे गांव ने हमारा साथ दिया। इसके लिए सभी का तहेदिल से धन्यवाद। - तन्नू