एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए रामसिंहपुरा में सिंचाई विभाग की 14 एकड़ जमीन फिलहाल हवा में ही है। जमीन देने के लिए सिंचाई विभाग ने 15 करोड़ रुपये की डिमांड की थी। जमीन के लिए कभी सरकार की ओर से रकम देने को लेकर हरी झंडी हुई तो कभी मांगी गई कीमत कम करने को लेकर सिंचाई विभाग को लिखा गया। कई छोटे-बड़े प्रयासों के बावजूद अभी तक की स्थिति यह है कि जमीन पर ठोस कचरा निस्तारण की व्यवस्था ही नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि इस मिस मैनेजमेंट को प्रशासन कैसे मैनेज कर पाएगा। क्योंकि अगले साल भी केंद्र की ओर से टीम सफाई व्यवस्था का जायजा लेने के लिए पहुंचेगी।
-------------
15 के बजाय देने थे 4.55 करोड़ रुपये
प्लांट के लिए रामसिंहपुरा में चौदह एकड़ जमीन के लिए पहले सिंचाई विभाग ने 15 करोड़ रुपये की डिमांड की थी। इसके बाद काफी जद्दोजहद हुई और मामला डीसी डॉ. यश गर्ग के पास पहुंचा। डीसी ने सरकार को एक पत्र लिखकर सिंचाई विभाग से जमीन खरीदने के लिए जरूरी 15 करोड़ रुपये नगर परिषद को देने की प्रार्थना की। जवाब में सरकार ने सिंचाई विभाग की जमीन की कीमत कुल कीमत की एक तिहाई कर दी। सरकार ने जमीन लेने की स्थिति में 15 करोड़ रुपये की बजाय 4.55 करोड़ रुपये सिंचाई विभाग को अदा करने के लिए नगर परिषद को लिखा था।
----------
कई जगह का कूड़ा पड़ने से फंसा पेच
दरअसल सालों की कोशिश के बाद ठोस कचरा प्रबंधन प्लांट के लिए रामसिंहपुरा गांव में सिंचाई विभाग की प्रस्तावित जमीन लेने के लिए नगर परिषद को मोटी रकम चुकानी थी। काफी प्रोसीडिंग पूरी भी हो गई थी। जब नप को यह पता चला कि रामसिंहपुरा में जिले के ही कस्बे धारूहेड़ा और बावल ( जिनकी खुद की नगर पालिकाएं हैं) के अलावा महेंद्रगढ़ का भी कूड़ा पड़ना है तो एक बार फिर से ठोस कचरा निस्तारण के प्लांट मामले में पेच आ गया। ऐसे में नगर परिषद ने प्लांट के लिए दी जाने वाली रकम से साफतौर पर इनकार कर दिया।
-------------
डोर टू डोर कचरा उठाना भी साल भर से कागजों पर
शहर को साफ-सुथरा रखने की योजना को पूरी तरह अमली जामा पहनाने के लिए हाथ रिक्शा समेत 127 वाहन आने थे। इनमें 1 जेसीबी, 2 डंपर, 2 डंपर प्लेसर, 20 टेंपो, 2 ट्रैक्टर-ट्राली, 100 हाथ रिक्शा थे। अभी तक नगर परिषद के पास महज हाथ रिक्शे ही हैं। बाकी के संसाधनों पिछले एक साल से महज कागजों पर ही हैं। हालात यह है कि जो कुछ वाहन नगर परिषद के पास हैं, वे भी किराए के ही हैं। ऐसे में शहर की सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है।
----------
शहरों के बीच ही डंपिंग प्वाइंट में डाला जाता है कचरा
जरूरी संसाधनों के अभाव के साथ ही नगर परिषद के सफाई कर्मियों के ड्यूटी के दौरान महज हाजिरी लगाकर अनुपस्थित रहने के आरोप आए दिन पार्षद लगाते हैं। इसके अलावा कचरा उठान की सही व्यवस्था न होने के चलते सफाई कर्मचारी भी अस्थाई रूप से बनाए गए डंपिंग प्वाइंट पर ही कचरा फेंक देते हैं। जिसे कई बार शहर में ही जला भी दिया जाता है। ऐसे में प्रॉपर कचरा उठान के बाद ही समस्या से मुक्ति मिल सकती है। शुक्रवार को डीसी ने आजाद चौक पर कूड़े के ढेर में लगी आग को देखकर एमई नगर परिषद से चालान करने के निर्देश भी दिए।
---------
डीसी ने लिया शहर का निरीक्षण
उपायुक्त डा. यश गर्ग ने शुक्रवार को स्थानीय सर्कुलर रोड, आजाद नगर, तुर्कियावास रोड, नसीयाजी रोड व एसटीपी, कानोड गेट, नाईवाली चौक सहित कालाका वाटर वर्क्स तक निरीक्षण किया तथा मौके पर उपस्थित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये। उन्होंने बताया कि अधिक गर्मी के कारण वर्षा कभी भी हो सकती है और शहर में बाढ़ जैसे हालात न बने और बारिश के समय में पानी निकासी की समस्या ना आये उसके समय रहते इन्तजाम कर लिए जाएं। उन्होंने सड़क के साथ बनाए जा रहे नाले के निर्माण कार्य का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को निर्दश दिए कि जहां-जहां नाला खुला छोड़ा गया है उस पर ढक्कन शीघ्र लगाए जाएं। इस मौके पर एसडीएम रेवाड़ी कुशल कटारिया, डीआरओ पीडी शर्मा, कार्यकारी अभियन्ता जनस्वास्थ्य डीएस दहिया, एमई नगरपरिषद रेवाडी अजय सिक्का, सुरेश कुमार समन्यवक आपदा प्रबन्धन सहित अन्य अधिकारीगण भी साथ रहे।
-------------
शहर साफ कैसे हो सकता है जब कई सफाई कर्मचारी ड्यूटी से ही नदारद रहते हैं। इसके अलावा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर भी कोई ठोस प्लानिंग नहीं है। ऐसे में सफाई के मामले में हमें फिर से शर्मसार ही होना पड़ा है।
-विनय यादव, पार्षद, वार्ड नंबर दो
------------
प्लांट हवा में ही बन रहा है। पिछले कुछ समय में महज शहर से अतिक्रमण ही हटा है। डंपिंग यार्ड और डस्टबिन के अभाव में सारा कूड़ा शहर में ही पड़ा रहता और जलाया जाता है। इससे कोई लाभ नहीं। जमीनी काम जरूरी हैं।
भारत भारद्वाज, पार्षद, वार्ड नंबर 18
-----------
वर्तमान सरकार आने के बाद से सफाई के मामले में जिले की स्थिति में सुधार हुआ है। पूरी तरह सुधार होने में कुछ वक्त तो लगेगा ही। सरकार का भी प्रयास यही है कि जल्द से जल्द ठोस कचरा निस्तारण प्लांट शुरू हो।
-गुरदयाल नंबरदार, पार्षद नंबर 12
-----------
नगर परिषद प्रधान की कुर्सी संभालने के बाद से ही सफाई व्यवस्था सुचारु रखने के लिए विशेष अभियान चलाए गए हैं। खुद मौके पर जाकर सफाई व्यवस्था भी देखी है। ठोस कचरा प्रबंधन के लिए जमीन पुख्ता कराने के लिए प्रशासन से मिलकर मजबूत प्रयास किए जाएंगे।
विनीता पीपल, प्रधान, नगर परिषद रेवाड़ी