फोटो: 11 रेवाड़ी। धारूहेड़ा क्षेत्र में उगी बाजरा की खेती। संवाद
रेवाड़ी। बाजरा, कपास और ग्वार के पौधों में फंगस और जड़ गलन रोग पैर पसार रहा है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों को एक ही सप्ताह में दो बार कीटनाशक का छिड़काव करने के बाद भी राहत नहीं मिलने से दोहरा नुकसान झेलना पड़ रहा है।
मौजूदा समय में जिले में करीब 72 हजार हेक्टेयर में बाजरा, 7 हजार हेक्टेयर में कपास व 200 हेक्टेयर में ग्वार की बिजाई की गई है। नमी बहुत ज्यादा बढ़ जाने के कारण ग्वार के पत्ते काले पड़ने शुरू हो गए हैं। कृषि अधिकारी ने बताया कि फंगस की रोकथाम के लिए कोई भी एक स्प्रे तुरंत इस्तेमाल करना जरूरी है। बाजरा, ग्वार व कपास फसलों में कीटों व फंगस की बीमारियों के उपाय के बारे में कृषि विभाग के अधिकारियों की सलाह पर दवाई खरीदनी जरूरी है।
सितंबर में होता है कीटों का प्रकोप
खंड कृषि अधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि सितंबर में लगातार वर्षा या सूखे के चलते बाजरा, कपास व ग्वार के पौधों में कीटों का सबसे अधिक प्रकोप होना आम बात है। किसान इससे भयभीत न हों, बल्कि खाद बीज केंद्र से इसकी दवाएं लाकर उनका सावधानी से प्रयोग कर छुटकारा पाने का काम करें। कपास में किसी भी ज्यादा जहरीले कीटनाशक या बिना सिफारिश किए गए कीटनाशकों के मिश्रण का प्रयोग न करें। कपास फसल में रस चूसने वाले कीटों की निगरानी के लिए प्रति एकड़ 20 पौधों की तीन पत्तियों पर सफेद मक्खी, हरा तेला एवं थ्रिप्स की गिनती हर सप्ताह करते रहें।