रेवाड़ी। परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) के सत्यापन में ऐसे 14 हजार लोगों की पहचान हुई है जो परिवार में अकेले हैं। इनमें से 7300 से अधिक लोगों की वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये से कम पाई गई है। सत्यापन के बाद 6,323 पात्र लोगों के बीपीएल कार्ड बनाए जा चुके हैं, जबकि शेष मामलों की जांच जारी है।
सीआरआईडी (क्रिड) विभाग के अनुसार सरकार का उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचाना है। इसी के तहत परिवार पहचान पत्र में अकेला सदस्य दर्ज कराने वाले लोगों की आय और पारिवारिक स्थिति का सत्यापन कराया जा रहा है।
जिन लोगों का दावा सही पाया जाएगा, उन्हें अलग फैमिली आईडी के आधार पर बीपीएल कार्ड, सरकारी राशन, आयुष्मान भारत योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और आय आधारित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा।
जिले में कई ऐसे लोग हैं, जो वास्तव में अकेले रह रहे हैं, लेकिन अलग फैमिली आईडी नहीं बनने या विवरण अपडेट नहीं होने के कारण अब तक विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित थे। सत्यापन पूरा होने के बाद ऐसे पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा।
यदि जांच में कोई व्यक्ति सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए गलत तरीके से अलग फैमिली आईडी बनवाता पाया गया तो उसकी फैमिली आईडी को मूल परिवार से जोड़ दिया जाएगा। इसके बाद पात्रता का निर्धारण नियमानुसार किया जाएगा।
सत्यापन अभियान के तहत संबंधित लोगों के मोबाइल पर लगातार संदेश भेजे जा रहे हैं। इसके बाद दस्तावेजों और पारिवारिक विवरण का मिलान किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर विभागीय टीमें मौके पर पहुंचकर भी सत्यापन कर रही हैं। अधिकारियों ने नागरिकों से परिवार पहचान पत्र में दर्ज विवरण समय पर अपडेट कराने की अपील की है।
पीपीपी स्टेट कोआर्डिनेटर डॉ. सतीश खोला ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मंशा है कि प्रदेश का कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी योजनाओं से वंचित न रहे। इसी उद्देश्य से पारदर्शी तरीके से सत्यापन कराया जा रहा है, ताकि योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचे और अपात्र लोगों को इसका लाभ न मिल सके।