रेवाड़ी। मच्छर और जलजनित बीमारियों का पीक सीजन शुरू हो गया है। अगस्त, सितंबर और अक्तूबर में डेंगू के अधिक मामले मिलते हैं। इस सीजन में अबतक डेंगू के चार और मलेरिया के 10 मरीज मिले हैं। इसको देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और बचाव अभियान तेज कर दिया है।
स्वास्थ्य विभाग के हेल्थ इंस्पेक्टर, डेंगू ब्रीडिंग चेकर (डीबीसी), एमपीएचडब्ल्यू, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं की टीमें जनवरी से ही घर-घर जाकर मच्छरों के लार्वा की जांच कर रही हैं। लार्वा मिलने पर अब तक 989 लोगों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से 11 लाख 73 हजार 454 से अधिक घरों का सर्वे किया जा चुका है। बुखार सर्वे, फॉगिंग और लार्वा नाशक दवा के छिड़काव का कार्य लगातार जारी है।
गत वर्ष जिले में डेंगू के 297 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें अगस्त में 101 और सितंबर में 95 मरीज मिले थे। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार विभाग पहले से ही सतर्क है और संभावित प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
मलेरिया नोडल अधिकारी डॉ. जोगेंद्र तंवर ने बताया कि मानसून के दौरान जलभराव होने से मच्छरों का प्रजनन तेजी से बढ़ता है। ऐसे में लोगों को अपने घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए।
कूलर, फ्रिज की ट्रे, फूलदान और अन्य पात्रों का पानी सप्ताह में कम से कम एक बार अवश्य बदलें तथा पानी की टंकियों को ढककर रखें।
उन्होंने लोगों से अपील की कि तेज बुखार, शरीर में दर्द, उल्टी-दस्त, पेट दर्द या अन्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। साथ ही सप्ताह में एक दिन ड्राई-डे मनाकर घर और आसपास के सभी पानी के पात्रों को खाली कर साफ करें, ताकि डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों की रोकथाम की जा सके।