रेवाड़ी। जिले में विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर का आकलन करने के उद्देश्य से फाउंडेशनल लर्निंग स्टडी (एफएलएस) परीक्षा 6 से 8 मई तक होगी। इसमें केंद्रीय विद्यालय, सीबीएसई और सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी भाग लेंगे। विशेष रूप से कक्षा तीन उत्तीर्ण कर चुके विद्यार्थियों के लिए यह परीक्षा आयोजित की जाएगी।
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की ओर से प्रोफेसर इंद्राणी भादुड़ी एवं उनकी टीम के मार्गदर्शन में संचालित किया जाएगा। वहीं, राज्य स्तर पर एससीईआर टी गुरुग्राम के समन्वयक डॉ. मनोज शर्मा एवं उनकी टीम इस प्रक्रिया का संचालन करेगी।
जिला स्तर पर इसका समन्वय जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान हुसैनपुर की ओर से किया जाएगा। जिला नोडल अधिकारी डॉ. सुरेंद्र कुमार ने बताया कि इस आकलन का उद्देश्य विद्यार्थियों के हिंदी और गणित विषयों में दक्षता आधारित स्तर का मूल्यांकन करना है।
यह परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस कार्य को जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, डायट प्राचार्य और आकलन प्रकोष्ठ प्रभारी के नेतृत्व में पूरा किया जाएगा।
आकलन प्रक्रिया की निगरानी के लिए डायट हुसैनपुर की ओर से वरिष्ठ प्राध्यापकों एवं अन्य प्राध्यापकों की नियुक्ति की गई है। जिला और राष्ट्रीय स्तर के अधिकारी भी इस प्रक्रिया की निगरानी करेंगे ताकि परीक्षा सुचारु रूप से संपन्न हो सके।
जिले में कुल 16 विद्यालयों का चयन किया गया है, जिनमें केंद्रीय विद्यालय, सीबीएसई स्कूल और सरकारी विद्यालय शामिल हैं।
-
टैबलेट के माध्यम से परीक्षा आयोजित करेंगे
इस आकलन के तहत फील्ड इंवेस्टिगेटर विद्यालयों में जाकर टैबलेट के माध्यम से परीक्षा आयोजित करेंगे। प्रत्येक विद्यालय में कक्षा तीसरी के एक सेक्शन से अधिकतम 12 विद्यार्थियों का चयन कर उनका आकलन किया जाएगा। परीक्षा से पहले विद्यार्थियों से एक सामान्य प्रश्नावली के माध्यम से कुछ प्रश्न पूछे जाएंगे। इसके बाद हिंदी और गणित विषयों का मूल्यांकन किया जाएगा।
फील्ड इंवेस्टिगेटर का ओरिएंटेशन हुसैनपुर में होगा
फील्ड इंवेस्टिगेटर का ओरिएंटेशन डायट हुसैनपुर में आयोजित किया जाएगा। इसके बाद उन्हें टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे, जिनके माध्यम से पूरी प्रक्रिया संपन्न होगी। इसके अतिरिक्त जिन शिक्षकों ने कक्षा तीसरी के विद्यार्थियों को पढ़ाया है, उनसे भी प्रश्नावली के जरिए जानकारी ली जाएगी। अधिकारियों ने सभी विद्यालय प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि वे इस आकलन प्रक्रिया में इसे सफल बनाने के लिए पूरा सहयोग प्रदान करें। यह पहल विद्यार्थियों के बुनियादी शिक्षा स्तर को समझने और उसे सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।