फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पूर्व सैनिकों को नहीं मिल रहा इलाज

Tue, 29 Dec 2015 12:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/रेवाड़ी
विज्ञापन
विज्ञापन
सीमा पर देश की रक्षा करने के लिए जान लड़ाने वाले रेवाड़ी के सैनिकों और उनके परिजनों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए खोल गए ईसीएचएस पॉलीक्लीनिक में दूरदराज से आने वाले सैनिक परिवारों को स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की सेवा नहीं मिल रही है। यहां स्पेशलिस्ट की तीन पोस्ट है और तीनों ही खाली है।
विज्ञापन


 केवल तीन मेडिकल ऑफिसरों के जिम्मे यहां पॉलिक्लिनिक में रजिस्टर्ड करीब 41 हजार 29 लोगों का स्वास्थ्य निर्भर है। स्पेशलिस्ट डॉक्टर न होने की वजह से पूर्व सैनिकों और उनके परिवारजनों को या तो दूसरे शहरों की तरफ रुख करना पड़ता है या फिर प्राइवेट अस्पतालों में जेब ढीली करनी पड़ती है।

इस मसले पर पॉलिक्लिनिक के स्थानीय अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि वे मीडिया से बातचीत करने के लिए अथॉराइज्ड नहीं है। उल्लेखनीय है कि रेवाड़ी में 25 हजार पूर्व सैनिक हैं तो 25 हजार के करीब ही फिलहाल सेना में हैं। उनके परिजनों का भी निशुल्क इलाज होने का प्रावधान है।
विज्ञापन


गायनोकॉलोजिस्ट की पद भी खाली, चाइल्ड स्पेशलिस्ट की पोस्ट नहीं
पॉलिक्लिनिक में मेडिकल स्पेशलिस्ट की दो और गायनोकॉलोजिस्ट की एक पोस्ट है। यह तीनों ही खाली है। ऐसे में सैनिकंों की बीवी हो या मां-बहन, इन्हें भी यहां गायनोकॉलोजिस्ट की सेवा नहीं मिल रही है। इतना ही नहीं यहां पर चाइल्ड स्पेशलिस्ट की पोस्ट ही न होने से सैनिकों के बच्चों का तो यहां इलाज ही नहीं हो रहा है। इसके अलावा यहां रेडियोलॉजिस्ट की पोस्ट भी लंबे समय से खाली है। इस वजह से जांच रिपोर्ट भी रेडियोग्राफर ही तैयार कर रहे हैं।

पांच घंटे मेडिकल स्पेशलिस्ट की सेवा का है प्रावधान
पोलिक्लिनिक में नियमानुसार मेडिकल स्पेशलिस्ट की सेवा हर दिन पांच घंटे और मेडिकल ऑफिसर की आठ घंटे निर्धारित है, लेकिन यहां फौजियों को मेडिकल स्पेशलिस्ट की सेवा नहीं मिल रही।

2004 में खुला था पॉलिक्लिनिक
रेवाड़ी में 15 जनवरी, 2004 को ईसीएचएस पॉलीक्लीनिक शुरू हुआ था। इसके बाद से इसका न तो विस्तार हुआ और न ही सुविधाओं में बढ़ोतरी हुई। 2008 में सेक्टर-10 में जमीन भी देखी गई लेकिन अभी तक इस पर काम शुरू नहीं हुआ। पिछले दिनों रेवाड़ी आए सेना के अधिकारियों के सामने भी पूर्व सैनिकों ने इसे लेकर मांग रखी थी।

दवाइयां तक पूरी नहीं मिलती
हरियाणा एक्स सर्विस लीग के रेवाड़ी डेलीगेट प्रधान सूबे सिंह का कहना है कि पॉलीक्लीनिक में पर्याप्त स्टाफ न होने से काफी परेशानी हो रही है। पेशेंट प्राइवेट अस्पतालों में जाने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि पूरी दवाइयां तक नहीं मिल रही है।

पर्याप्त सुविधा न होने से परेशान हैं हजारों लोग
एंटी डिस्क्रिमनेशन कोर के प्रतिनिधि अशोक कुमार का कहना है कि पॉलीक्लीनिक में सैनिकों और उनके परिजनों के लिए पर्याप्त सुविधा नहीं है। जो डॉक्टर हैं, वह मेडिकल ऑफिसर हैं, जो केवल सामान्य बीमारियों की दवाइयां दे सकते हैं। स्पेशलिस्ट न होने से 41 हजार लोग परेशान हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें