बावल। प्राणपुरा रोड स्थित गांव टीकला करीब 600 साल पूर्व राजस्थान के झुंझुनू जिले के गांव पाली से आए पांच भाइयों में से टेकराम ने बसाया था। उन्हीं के नाम पर गांव का नाम टीकला रखा गया। अन्य चार भाइयों में प्राण, राणा, किशना व भूड़ाराम ने भी आसपास अलग-अलग चार गांव बसाए हुए हैं।
तीन हजार से अधिक की आबादी वाले इस गांव में बाबा भगवानदास की मान्यता है। मान्यता के अनुसार गांव में कोई भी व्यक्ति धूम्रपान नहीं करता है। अगर कोई व्यक्ति भूलवश ऐसा कर भी लेता है परिवार में नुकसान झेलना पड़ता है। गांव में बाबा भगवानदास का ऐतिहासिक मंदिर है, जहां कोई भी शुभ कार्य करने से पूर्व पूजा अर्चना की जाती है।
-300 से अधिक युवा कर रहे सेना में सेवा
गांव के 300 से अधिक युवा सेना में भर्ती होकर देेश की सेवा कर रहे हैं। युवाओं में सेना में भर्ती होकर देेश की सेवा करने का जज्बा भरा है। इसके अलावा गांव में आपसी भाईचारा है। गांव निवासी शिवलाल वर्ष 1990 में अंतरराष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में भी हिस्सा ले चुके हैं।
पहलवानी से भी गांव की पहचान
टिकला गांव जाट बाहुल्य है, इसमें टोकस ओर नेहरा गोत्र के लोगों की संख्या ज्यादा है। अन्य जातियों के लोग भी भाईचारे के साथ गांव में रह रहे हैं। गांव पहलवानों के नाम से भी जाना जाता रहा है। पहलवानी करके गांव का नाम रोशन कर रहे है ओमबीर ने बताया कि 1990-91 में नेशनल पहलवान शिवलाल भूटान देश तक कुश्ती में गांव का नाम रोशन कर चुके हैं। भगवानदास सेवा समिति गरीब बच्चों और लोगों की मदद करती है।
फैक्ट फाइल
कुल मतदाता: 850
महिला- 400
पुरुष- 450
आंगनबाड़ी- 1
कुल घर- 320
मंदिर- 2
चौपाल- 3
गांव में बाबा भगवानदास की मान्यता है। मान्यता के अनुसार गांव में कोई भी व्यक्ति धूम्रपान नहीं करता है। सभी ग्रामीण आपस में मिलजुल कर रहते हैं। इसके अलावा विकास के मामले में गांव अन्य गांवों से आगे है।
-बिमलेश, सरपंच
गांव के हर घर से एक युवक सेना में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहा हे। युवाओं मेें सेना में भर्ती होने का जोश है। इसके अलावा बाबा भगवानदास की मान्यता के कारण गांव के युवा धूम्रपान से बहुत दूर है।
-ओमबीर, ग्रामीण
गांव के लोग आपस में मिलजुल कर रहते हैं। बाबा भगवानदास सेवा समिति की ओर गांव में जरूरतमंदों की सेवा की जाती है। सभी ग्रामीण विकास कार्यों में भी मिलजुल कर रहते हैं।
-भरत सिंह
गांव में बाबा भगवानदास की मान्यता है। कोई भी ग्रामीण धूम्रपान नहीं करता है। गांव में आने वाले रिश्तेदार भी यहां धूम्रपान नहीं करते हैं। ग्रामीणों में आपसी तालमेल रहता है।
-हरचंद
विकास के मामले में गांव काफी आगे है। सभी ग्रामीण आपस में मिल बैठकर छोटे-मोटे मामलों को सुलझाते हैं। गांव के युवाओं को पहलवानी में काफी रुझान है।
-शिवलाल
गांव का इतिहास काफी पुराना है। आसपास के गांवों के साथ ग्रामीणों का बेहद अच्छा तालमेल है। गांव प्राणपुरा, रानौैली, किशनपुरा व पावटी आदि के ग्रामीणों के साथ वर्षों से मेेलजोल है।
कप्तान हरि सिंह