रेलवे कॉलोनी में पूजा की तैयारी करतीं महिलाएं। स्रोत : समिति
रेवाड़ी। सूर्य की उपासना के पर्व छठ की शुरुआत शनिवार से नहाए खाए से हुई। पहिले-पहिले हम कइनी, छठी मइया व्रत तोहार...गोदी के बलकवा के दिह, छठी मइया ममता दुलार...गीतों की गूंज के साथ चार दिवसीय छठ पर्व शुरू हुआ।
छठ व्रतियों ने सुबह से भगवान भास्कर की आराधना के महापर्व छठ का अनुष्ठान कर नहाय-खाय से शुरू किया। घरों में छठ मैया के गीतों के साथ लोगों ने पूजा की। नहाए खाए में छठ व्रतियों ने लौकी की सब्जी का सेवन कर शुरू किया।
रविवार को खरना पूजन के साथ 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाएगा। सोमवार की शाम अस्ताचलगामी सूर्य और मंगलवार को सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। राजधानी समेत प्रदेश भर में छठ महापर्व को लेकर उल्लास है।
छठ व्रती घाटों से जल ले जाकर मिट्टी के बने चूल्हे पर शुद्ध वातावरण में प्रसाद तैयार करेंगे। 36 घंटे के निर्जला व्रत के साथ व्रती सूर्य की आराधना में डूबे रहेंगे।
जिले में करीब 80 जगह पर छठ पर्व मनाया जाएगा
जिले में करीब 80 जगह पर छठ पर्व मनाया जाएगा। छठ पूजा बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रमुख पर्व है लेकिन अब यह पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाने लगा है। रेवाड़ी, बावल, धारूहेड़ा में भी हजारों की संख्या में पूर्वांचल से जुड़े परिवार निवास करते हैं जिनके सहयोग और सहभागिता से यह पर्व हर साल धूमधाम से मनाया जाता है। महिलाओं से लेकर पुरुष और बच्चे सभी मिलकर व्रत, गीत और पूजा-पाठ के माध्यम से सूर्य देव और छठी माई की आराधना करते हैं। इस बार भीड़ अधिक बढ़ने की संभावना है। शहर में सोलहाराही तालाब में कृत्रिम घाट बनाया गया है।