रेवाड़ी।दूसरों की जान बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन करने वाले दमकल कर्मचारियों की खुद की जान जोखिम में रहती है। केवल रस्सियों के सहारे फायर ब्रिगेड के कर्मचारी साल मेें 50 से ज्यादा रेस्क्यू ऑपरेशन कर लोगों की जान-माल बचाते हैं। यह वह संख्या है जिसमें आग लगने की घटनाएं शामिल नहीं हैं। इन रेस्क्यू ऑपरेशन में किसी को फंसी जगह से बाहर निकालना, कुएं, जोहड़ या अन्य किसी स्थान से निकालना भी शामिल है। प्रशासनिक हीला-हवाली के चलते इन आपरेशन के लिए दमकल कर्मचारियों के पास मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन करने के नाम पर विभाग के पास केवल रस्सियां ही हैं। इस कारण उनकी ही जान सांसत में बनी रहती है। बावजूद इसके दमकल कर्मचारी बिना किसी शिकवा शिकायत के लोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते रहते हैं।
जान बचाने के उपकरणों का अभाव
दमकल विभाग विभिन्न रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए तैयार रहते हैं। इनमें जिले के अलावा विभिन्न छोटे-बड़े पशु पक्षियों को भी कुएं, जोहड़, दलदल और अन्य जगह से निकालना होता है। नियमानुसार दमकल विभाग के कर्मचारियों के पास इन रेस्क्यू आपरेशन के लिए हाइड्रोलिक सीढ़ी, ऑक्सीजन मास्क, एक जनरेटर, स्ट्रेचर, कटर आदि होने चाहिए। रेवाड़ी में दमकल विभाग के पास महज रस्सियां ही हैं। बाकी सारा काम जुगाड़ पर ही निर्भर करता है।
ढाई साल से खराब पड़ी सड़ रही रेस्क्यू वैन
दमकल विभाग की बिल्डिंग में एक रेस्क्यू वैन ढाई साल से कंडम खड़ी है। जर्जर हो रही इस वैन को न तो निकालने के आदेश हैं, न ही रिपेयर करने या कराने का। विभाग के कर्मचारियों की मानें तो बिना रेस्क्यू वैन के कुएं से लोगों या जानवरों को निकालने में काफी परेशानी होती है। महज रस्सी के सहारे रेस्क्यू ऑपरेशन करना काफी कठिन है।
आनी थी एक्स्ट्रा वैन, अब तक पता नहीं
रेवाड़ी की 10 लाख से ज्यादा आबादी पर महज नौ दमकल गाड़ियां ही हैं। चार स्टेशनों पर बनी इन गाड़ियाें मेें से तीन रेवाड़ी शहर में हैं। इनमें 10 हजार, साढ़े सात हजार, साढे़ चार हजार और दो हजार लीटर वाटर कैपिसिटी की गाड़ियां हैं। इसके अलावा एक गाड़ी धारूहेड़ा, एक कोसली और तीन गाड़ियां बावल क्षेत्र में हैं। विभागीय कर्मचारियों के मुताबिक जिले में छोटी और बड़ी चार और गाड़ियां आनी थी, लेकिन उनका अभी तक पता नहीं है।
फायर ब्रिगेड ने मशक्कत कर निकाला बाहर
धारूहेड़ा में निखरी कट के पास पिछले साल अक्तूबर माह में दो ट्रक चालक पुलिस का पीछा करने पर एक खेत में बने 40 फिट गहरे कुएं में गिर गए थे। मामले की जानकारी कंट्रोल रूम के जरिए फायर ब्रिगेड तक पहुंचाई गई। सुबह करीब छह बजे फायर ब्रिगेड की गाड़ी मौके पर पहुंची। इसके बाद कुएं में गिरे सुमित और भगत सिंह को निकालने में करीब दो घंटे लगे थे। इस हादसे में सुमित बच गया जबकि भगत सिंह की मौत हो गई थी। अगर इस मामले में दमकल कर्मियों के पास रेस्क्यू वैन होती तो दोनों की जान बचाई जा सकती थी।
यह सही है कि दमकल विभाग के पास रखी रेस्क्यू वैन खराब होने के कारण लंबे समय से उपयोग में नहीं आ रही है। बिना रेस्क्यू वैन और उपकरणों के विभाग के कर्मचारियों को कई जगह परेशानी का भी सामना करना पड़ता है। इसके अलावा गाड़ियों की भी कमी है। जल्द ही पूरी करने के लिए प्रक्रिया शुरू करवाई जाएगी। -
बिजेंद्र सिंह हुड्डा, सीटीएम, रेवाड़ी