रेवाड़ी। शहर के चौक चौराहों पर आसानी से मिलने वाला फास्ट फूड युवाओं और बच्चों को बीमार कर रहा है। जंकफूड खाने से पेट से संबंधित बीमारियों के मरीज नागरिक अस्पताल में बढ़ रहे हैं। प्रतिदिन 50 से 60 मरीज अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। वहीं चिकित्सक घर से बाहर का खाना नहीं खाने की सलाह भी दे रहे हैं।
छोटे बच्चों को जंक फूड पिज्जा, बर्गर, चाऊमीन, चिप्स एवं सॉफ्ट ड्रिंक की आदत हो गई है। इस कारण युवा और बच्चे हार्ट रोगी, पेट दर्द, मोटापा, हार्मोन संबंधित बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। डॉ. मनीष यादव के अनुसार, बच्चों में मोटापा का कारण शुगर और बीपी की समस्या आ रही है। प्रत्येक अभिभावकों को इस संदर्भ में जागरूक होना बहुत जरूरी है कि बच्चों को जंक फूड की जगह पौष्टिक भोजन दें। सीजनल सब्जी खिलाएं और पानी का विशेष ध्यान रखें।
डॉ. मनीष यादव ने बताया कि टिफिन में जंक फूड देने से परहेज करें। जंक फूड को स्वादिष्ट बनाने के लिए नमक का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन यह बीमारी भी पैदा करता है। कम उम्र में शुगर, हार्ट अटैक और किडनी और मानसिक एवं शारीरिक बीमारियां हो रही हैं। देश की वर्तमान स्थिति का आकलन करते हुए आगाह किया गया है कि जंक फूड में नमक, चीनी और वसा की मात्रा काफी ज्यादा होती है। यही बीमारी का बड़ा कारण बनता है।
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बच्चों को शारीरिक व्यायाम जरूर कराएं
जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. दिनेश सिंह ने बताया कि उनके यहां प्रतिदिन 30 से 40 मरीज आते हैं। उन्हें आयुर्वेद में जंक फूड की जगह प्रारंभिक भोजन की सलाह दी जाती है। मौसम के अनुसार, बच्चों को खानपान की सलाह दी जाती है। मौसमी फल और सब्जी जरूर दें। क्यों कि इससे शारीरिक और मानसिक विकास होता है। बच्चे का स्वास्थ्य अच्छा रहता है। आजकल बच्चों में मोबाइल के लगातार यूज से आंख की बीमारी उत्पन्न हो रहीं हैं। बच्चों को शारीरिक व्यायाम जरूर कराएं। उन्होंने बताया कि इससे बच्चों के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। बच्चे मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहते हैं। बच्चों के मानसिक विकास के लिए शंखपुष्पी बहुत महत्वपूर्ण औषधि होती हैं और उसका सेवन आयुर्वेदाचार्य के अनुसार ग्रहण करें। उन्होंने बताया कि अशुद्ध भोजन खाने के साथ होने वाली बीमारियों के शिकार सबसे ज्यादा छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और कमजोर लोग होते हैं। मानव की अच्छी सेहत के लिए अच्छा भोजन बहुत जरूरी है। अशुद्ध भोजन खाने साथ डायरिया से लेकर कैंसर तक लगभग 200 बीमारियां लगने का खतरा बना रहता है।