खेत में लहलाती गेहूं की फसल। संवाद
रेवाड़ी। फरवरी में मौसम के बदलाव से किसान मायूस हैं। मौसम में गर्माहट की वजह से किसान चिंतित नजर आने लगे हैं। गेहूं की बुवाई वाले खेतों के लिए गर्म मौसम हानिकारक माना जा रहा है। वहीं तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण लोग बीमार पड़ने लगे हैं।
शुक्रवार को अधिकतम तापमान 29.5 जबकि न्यूनतम 9.5 डिग्री दर्ज किया गया। लगातार बढ़ रहे तापमान से पछेती फसलों को ज्यादा नुकसान हो सकता है। मौसम विभाग के आंकड़ों पर गौर करे तो इसी सप्ताह के शुरुआत में दिन का तापमान अधिकतम 33 और न्यूनतम 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। गेहूं के लिए पूरी फरवरी में ठंडक का मौसम मुफीद माना जाता था। इस बार बदलते मौसम के मिजाज से किसान चिंतित हैं। खासकर पछेती में बोया गया गेहूं में गर्म मौसम नुकसान पहुंचा रहा है। यदि आने वाले एक हफ्ते में भी यही हालत रही तो गेहूं को भारी नुकसान होने का अनुमान है।
किसान भूपेंद्र बताते हैं कि इस समय ज्यादा गर्मी पड़ने से गेहूं का दाना कमजोर होगा। उन्होंने बताया कि सरसों में माहू (कीट) लग सकता है, जिससे सरसों का दाना कमजोर हो सकता है और उत्पादन में भी गिरावट देखने को मिल सकती है। उन्होंने बताया कि अचानक तापमान बढ़ा तो गेहूं की पैदावार में नुकसान होगा और यह जल्दी पकने से उत्पादन में कमी आएगी। गेहूं की फसल ठंड की मानी जाती है।
मौसम के परिवर्तन से नवंबर महीने में बोया गेहूं की फसल को नुकसान हो सकता है। आगामी एक हफ्ते में तापमान इसी तरह बढ़ता रहा, तो गेहूं की पैदावार कम होगी। मौसम ज्यादा गर्म होना गेहूं की फसल के लिए नुकसानदायक है। इससे गेहूं की फसल में स्टार्च व कैल्शियम नहीं बनेगा।
- जसविंद्र सैनी, उपनिदेशक, कृषि विभाग