दिल्ली हिंसा के बाद किसान आंदोलन पर मंडराते संकट के बादलों के बीच गाजीपुर बॉर्डर पर किसान नेता राकेश टिकैत के आंसुओं का असर हरियाणा के किसानों पर भी होने लगा है। शुक्रवार सुबह से ही बावल के किसान खेड़ा बॉर्डर पर पहुंचने शुरू हो गए थे।
हालांकि भारतीय किसान यूनियन टिकैत का एक गुट शुरुआती दिनों से ही दिल्ली-जयपुर हाईवे के गढ़ी बोलनी चौक, मसानी बैराज पर धरना दे रहा था। लेकिन अब दूसरी पार्टियों के किसान भी धरना स्थल पर दिखाई दे रहे हैं।
किसानों की बढ़ती संख्या से एक बार फिर से आंदोलन कर रहे किसानों का मनोबल बढ़ गया है। किसान नेताओं का कहना है कि अब किसी भी कीमत पर बॉर्डर को खाली नहीं करेंगे और जब तक कृषि कानून वापस नहीं होंगे, आंदोलन चलता रहेगा। खेड़ा बॉर्डर पर राजस्थान सरकार ने एएसपी स्तर के पुलिस अधिकारी व एडीएम को तैनात कर दिया है। बावल के किसानों ने धरना स्थल पर दूध व सब्जी भी पहुंचानी शुरू कर दी है।
खेड़ा बॉर्डर पर संख्या कम की बजाय बढ़ने लगी
गाजीपुर बॉर्डर प्रकरण के बाद खेड़ा बॉर्डर पर किसानों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ने लगी है। राजस्थान के अलवर व रेवाड़ी के बावल के किसान धरनास्थल पर हर संभव मदद कर रहे हैं। पहले की तरह ही खेड़ा बॉर्डर पर तीन स्थानों पर लंगर शुरू हो गया है। धरना स्थल पर करीब तीन हजार किसान व सैकड़ों की संख्या में ट्रैक्टर व अन्य वाहन मौजूद हैं। वहीं तीन किलोमीटर के क्षेत्र में टेंट लगे हुए हैं।
खेड़ा बॉर्डर पर 13 दिसंबर से किसान आंदोलन चल रहा है। वहीं 30 दिसंबर से मसानी बैराज पर चल रहे धरने को स्थानीय लोगों के विरोध के बाद 27 जनवरी को हटा दिया गया था। मसानी बैराज के किसान अब खेड़ा बॉर्डर पर डटे हुए हैं।