जिले की रेवाड़ी और कोसली अनाज मंडी में गेहूं खरीद के पहले दिन एक भी दाना नहीं खरीदा गया। कोसली में हजारों क्विंटल गेहूं लेकर किसान पहुंचे लेकिन अधिकारी नहीं आए। जबकि रेवाड़ी मंडी में गेहूं की आवक न के बराबर है। यहां पूरी मंडी में एक-दो ढेरी गेहूं ही दिखाई दिया। जबकि यहां सरसों की काफी आवक है लेकिन सरकारी खरीद नहीं हो रही।
किसान सड़कों पर अपनी सरसों लिए प्राइवेट एजेंसियों के आने के इंतजार में रहते हैं। खास बात यह है कि दोनों ही जगह किसानों के लिए पानी, बारिश होने पर तिरपाल आदि की सुविधा आढ़तियों के भरोसे है। मंडी प्रशासन ने शेड लगाए हुए हैं, लेकिन वह जगह पर्याप्त नहीं है। ऐसे में यदि बारिश आती है तो किसान की मेहनत पर काफी असर पड़ सकता है। कोसली मंडी में तो शेड भी नहीं है। पेयजल के लिए बनाई टंकी में पानी भी नहीं है।
क्या कहना हे किसानों का
कोसली मंडी में गेहूं लेकर पहुंचे किसान अशोक कुमार का कहना है कि एक ओर तो प्रदेश सरकार व प्रशासन गेहूं की खरीद एक अप्रैल से शुरू करने की बात कह रहा है वहीं पहले दिन एक भी दाना नहीं खरीदा गया। काफी किसान मंडी में हजारों क्विंटल गेहूं लेकर खुले आसमान के नीचे बैठा हुआ है। किसान रतन सिंह का कहना है कि कोसली मंडी में कोई सुविधा नहीं है। न तो बैठने के लिए छाया है और न ही पानी की व्यवस्था है। पहले दिन एक भी अधिकारी नहीं पहुंचा। युवा किसान विश्वेंद्र का कहना है कि कोसली मंडी में जिस प्रकार से हर साल किसानो के साथ होता आया है, वही इस साल हो रहा। बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। गर्मी में खुद ही इधर-उधर बैठने की व्यवस्था करते हैं। कोसली में किसान भवन बनाया गया है, लेकिन वहां विश्राम करने के लिए किराया वसूला जाता है। भजनलाल का कहना है कि कोसली मंडी में किसानों के शोषण के सिवा कुछ नहीं हो रहा। किसान मंडी में गेहूं लेकर आ रहे हैं लेकिन उनकी साल भर कि कमाई को खरीदने वाला नहीं है। किसान खुले आसमान के नीचे फसल लेकर बैठा हुआ है। जगदीश का कहना है कि कोसली मंडी में किसानो की एक नहीं सुनी जा रही है। किसानों को पीने का पानी तक नहीं मिल पा रहा है। मंडी में किसानों के लिए मात्र एक पानी की टंकी बनाई गई है, जिसकी वर्षों से सफाई तक नहीं की गई। उसमें भी पानी नहीं है।
क्या कहना है खरीद अधिकारी का
हैफेड वेयर हाउस के मैनेजर सतेंद्र यादव का कहना है कि कोसली मंडी में कर्मचारी अमरजीत की ड्यूटी लगाई है। उससे बातचीत की जाए। जब अमरजीत से बात की तो उसने कहा कि अभी खरीद कहां होगी। आज तो ड्यूटी लगाई गई है। अभी रीलिव नहीं हुआ। एक दो दिन में बता पाऊंगा कि खरीद कब शुरू करते हैं।
सरसों की अच्छी कीमत मिलने से किसान खुश
रेवाड़ी अनाज मंडी में सरसों की आवक खूब हो रही है। किसान सरसों के भाव से काफी खुश है। क्योंकि सरकार की ओर से तय समर्थन मूल्य 3350 से कहीं ज्यादा कीमत प्राइवेट एजेंसियां दे रही है। पिछले साल के मुकाबले इस बार किसानों को प्रति क्विंटल तीन सौ से पांच सौ रुपये का फायदा हो रहा है। ऐसे में किसान भी प्राइवेट एजेंसियों को ही सरसों बेच रहे हैं। किसान उमेश कुमार, सज्जन सिंह, बाबूलाल व कालू आदि का कहना है कि सरसों की क्वालिटी अच्छी है। इसलिए पैसे ठीक मिल रहे हैं। पिछले साल 2700 से तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल सरसों बिकी थी। इस बार 3100 से 3600 रुपये तक बिक रही है। हालांकि मौसम की वजह से उत्पादन पर कुछ असर पड़ा है। पिछले साल मौसम ज्यादा खराब होने से क्वालिटी पर फर्क पड़ा था। किसानों का कहना है कि मंडी में पानी आदि की व्यवस्था आढ़तियों ने ही की हुई है। बारिश होने पर भी आढ़ती पर ही निर्भर हैं।