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शामलात जमीन के मालिकाना हक के लिए नांगल शहबाजपुर के किसान हुए एकजुट

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रेवाड़ी। शामलात देह जमीन के मालिकाना हक के मुद्दे पर एक बड़ा आंदोलन खड़ा करने के लिए गांव-गांव जाकर किसानों की टीम बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। इसको लेकर किसान एकजुट भी हो रहे हैं। उन्होंने विधायकों, सांसदों और मंत्रियों के घेराव की चेतावनी भी दी है।
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एडवोकेट मुकेश ने शामलात देह जमीन के मालिकाना हक के मुद्दे पर गांव नांगल शहबाजपुर मे किसानों की एक पंचायत की। पंचायत की अध्यक्षता 82 वर्षीय ताराचंद सैनी ने की। मुकेश ने बताया कि शामलात देह जमीन व पंचायत देह जमीन किसानों की दादालाई जमीन है। इस जमीन पर हमारे पूर्वजों से लेकर हम आजादी के पहले से लेकर अब तक खेती करते आ रहे हैं। इस जमीन पर हमारे पूर्वजों ने आजादी के बाद तक लगान भी दिया है। इस लगान को तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल ने खत्म किया था। 26 जनवरी 1950 के बाद बने विलेज कामन लैंड एक्ट के अनुसार भी जो किसान देश आजादी से लेकर अब तक जिस जमीन पर वह खेती करता आ रहा है, वह उस जमीन का मालिक है। इस शामलात देह जमीन को पहले खरीदा व बेचा भी जाता था। इस जमीन पर अकाल व बाढ़ का मुआवजा भी मिलता था। इस जमीन पर किसानों को बैंक लोन व जिप्सम जैसे खाद पर सब्सिडी भी मिलती थी। इस पर ट्यूबवेल कनेक्शन भी होते थे। अब वर्तमान भाजपा सरकार ने तो इन सब सुविधाओं को पूरी तरह से खत्म ही कर दिया है। ग्रामवासियों ने कहा कि भाजपा सरकार के व अन्य राजनीतिक दलों के वर्तमान सभी विधायक आगामी शीतकालीन सत्र में किसानों को शामलात देह जमीन का मालिकाना हक देने का कानून जल्द से जल्द तैयार करके किसानों को मालिकाना हक प्रदान करें। नहीं तो सरकार का हर संभव विरोध करने के लिए एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया जायेगा। आगामी लोकसभा व विधानसभा चुनावों में भाजपा सरकार के विधायकों, मंत्रियों व अन्य दलों के वर्तमान विधायकों का भी घेराव किया जायेगा। इस मौके पर शयोदान सैनी, मास्टर नेमीचंद सोनी, दया राम सैनी पन्नालाल सैनी, बनवारी लाल, डूंगरमल, सीताराम, करतार सिंह आदि मौजूद रहे।
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