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शिक्षा के प्रति समर्पण और सेवा के लिए ‘गुरु दक्षिणा’ में सम्मान

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रेवाड़ी। शिक्षा के प्रति समर्पण और सेवा भाव के लिए जिले के दस शिक्षकों को गुरु दक्षिणा के रूप में ‘राज्य शिक्षक का सम्मान’ दिया गया है। इससे सभी लोगों में हर्ष है। वहीं गुरुओं ने इसे पूरे शिक्षा जगत एवं समाज का सम्मान बताया है। उनका कहना था कि यह सम्मान शिक्षकों में अपने कर्तव्य को लेकर प्रतिस्पर्धा के साथ अन्य शिक्षकों एवं बच्चों के लिए प्रेरणा पुंज और नए आदर्श स्थापित करेगा। जल्द ही राज्य मुख्यालय पर आयोजित विशेष समारोह में राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय सम्मानित करेंगे।
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इन गुरुओं को मिलेगा सम्मान
जिले में राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल ततारपुर इस्तमुरार से संस्कृत शिक्षक बिजेंद्र, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय डहीना से ईएसएचएम सत्यपाल सिंह, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रेवाड़ी की ईएसएचएम रेनू वर्मा, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जाटूसाना से पीजीटी जीव विज्ञान डॉ. हरिप्रकाश, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय तुर्कियावास से पीजीटी नरेंद्र सिंह, जो अभी मस्तापुर विद्यालय में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मोतला कलां से पीजीटी राजनीतिक विज्ञान सत्यपाल, राजकीय प्राथमिक पाठशाला नारायणपुर से पीआरटी पूनम यादव, राजकीय प्राथमिक पाठशाला अलावलपुर से पीआरटी सुनील कुमार, राजकीय प्राथमिक पाठशाला बोहतवास भोंदू से पीआरटी रविप्रकाश, और राजकीय उच्च विद्यालय लाला से हिंदी शिक्षिका समता यादव को राज्य शिक्षक पुरस्कार से के लिए चुना गया है, जिनकी सूची सोमवार को जारी हुई। इस सूची में कुल 10 शिक्षकों को यह सम्मान मिलेगा, जिसमें से जिला रेवाड़ी के तीन पीजीटी, तीन पीआरटी, दो ईएसएचएम और दो सी एंड वी शिक्षक शामिल हैं।
शिक्षा को आगे ले जाने का जज्बा पैदा करेगा सम्मान : सत्यपाल
शिक्षक सम्मान की सूची में नाम आने पर डहीना विद्यालय के अध्यापक सत्यपाल सिंह ने कहा कि उन्होंने इससे पहले भी दो बार सम्मान के लिए आवेदन किया था। निश्चित तौर पर शिक्षकों में यह सम्मान शिक्षा को आगे ले जाने का जज्बा पैदा करेगा। छह पुस्तकें लिखने के साथ, यूट्यूब पर चैनल के माध्यम विज्ञान एवं गणित विषयों पर प्रश्नोत्तरी, नूंह मेवात के सौ से अधिक गांवों में साइंस वैन के साथ बच्चों के लिए नया ज्ञान दिया। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की पाक्षिक पत्रिका में इनका एक लेख भी प्रकाशित हुआ। वे कहते हैं कि शिक्षा अंतर आत्मा से ज्ञान की अनुभूति कराती है और अच्छे शिक्षक को बच्चे बुढ़ापे तक याद रखते हैं। वे विज्ञान संसद के अलावा सांस्कृतिक गतिविधियों, रंगोत्सव के नौ के नौ मुकाबलों में हिस्सा लेने वाले शिक्षक, जिसमें एक बार वे तीन मुकाबलों में विजेता बने जबकि एक बार पांच मुकाबलों में विजय दर्ज की।
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सरकार बेटियों को समर्पित भाव से आगे बढ़ा रही : समता
हिंदी शिक्षिका समता यादव कहती हैं कि सरकार बेटियों की शिक्षा को समर्पित भाव से आगे बढ़ा रही है। सेनेटरी नैपकिन से लेकर वजीफा, वर्दी, किताबें और पौष्टिक आहार सबकुछ मुफ्त है, मगर अभी समाज में सरकारी विद्यालयों के प्रति लोगों की सोच नहीं बदली। इनमें तैनात शिक्षकों एवं उपलब्ध सुविधाओं को कमतर आंका जाता है। उम्मीद है कि यह सोच जरूर बदलेगी। नई शिक्षा नीति नए बदलाव लेकर आएगी। अब तक अभिभावक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले अपने बच्चों पर ध्यान नहीं देते थे। बालिकाओं को सरकारी स्कूलों में भेजा जाता है। शिक्षकों के पदों को तर्कसंगत बनाना वक्त की जरूरत है। ऐसा होने से ग्रामीणों को अपने गांव के सरकारी स्कूल बंद होने या वहां कम शिक्षक होने का आभास जरूर होगा। अगर सरकारी स्कूल बंद हुए तो गरीब परिवारों की बालिकाओं की शिक्षा प्रभावित होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावक अपनी बेटियों को दूर पढ़ने नहीं भेजना चाहते और इसके पीछे असुरक्षा का माहौल जिम्मेदार है।
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विद्यालय के लिए गौरव की बात : सुनील
अलावलपुर पाठशाला में गत छह वर्षों से तैनात शिक्षक सुनील कुमार बताते हैं कि उनके प्रयास से यह पाठशाला खंड व जिला स्तर पर मुख्यमंत्री सुंदरीकरण पुरस्कार विजेता बनी। यह सम्मान मिलना उनके विद्यालय के लिए गौरव की बात है। वे शिक्षा और शिक्षण संस्थानों को आगे बढ़ाने में अपनी ओर से श्रेष्ठ प्रयास करेंगे। उन्होंने विद्यालय को ऑपरेशन एंड मेंटिनेस में जिलास्तर पर प्रथम स्थान दिलाया। बच्चों के नामांकन बढ़ाने के साथ ही ‘पढ़े भारत-बढ़े भारत’, खेलों में बच्चों ने अपनी प्रतिभा दिखाई।
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मेरे पढ़ाये बच्चे पीएमटी परीक्षा उर्त्तीण कर चुुके हैं:डा हरिप्रकाश
जाटूसाना विद्यालय में तैनात शिक्षक डॉ. हरिप्रकाश मूल रूप से गांव जाडरा के हैं। बोडिया कमालपुर विद्यालय में वे पहले छात्र, फिर जीव विज्ञान प्राध्यापक एवं प्राचार्य बनकर अपनी सेवाएं देने पहुंचे। जीव विज्ञान के दक्ष अध्यापक होने के कारण उनसे पढ़े हुए अनेक बच्चे पीएमटी परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं। राज्यस्तरीय विज्ञान प्रदर्शन में विजेता बने, सांस्कृतिक कार्यक्रम में लोक गायन में नाम कमाया। उन्होंने इस सम्मान के लिए शिक्षा विभाग की प्रबुद्ध सम्मान चयन समिति और शिक्षा विभाग से जुड़े सहयोगियों, छात्रों एवं अभिभावकों के सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के लिए प्रति समर्पण भाव से काम करना भी समाजसेवा है। हर व्यक्ति को अपना कार्य ईमानदारी पूर्वक करना चाहिए।
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शिक्षा की नीतियों को आगे बढ़ाएंगे : नरेंद्र
तुर्कियावास विद्यालय में तैनात पीजीटी नरेंद्र सिंह बताते हैं कि यह सम्मान अभिभावकों, शिक्षकों एवं शिक्षा प्रेमियों का समाज में मान बढ़ाएगा। शिक्षा क्षेत्र में सरकार जो नीति लागू करेगी, उसे हम आगे बढ़ाएंगे। हमारे बढ़े भाई 31 जुलाई को प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी प्राचार्य हैं। उनका पूरा परिवार शिक्षा के प्रति समर्पित भाव से काम कर रहा है। निश्चित तौर पर समाज में शिक्षा को प्रोत्साहन मिलेगा। सभी के सहयोग से यह उपलब्धि मिली है। सरकार और शिक्षा विभाग का धन्यवाद।
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यह पूरे शिक्षक समाज का सम्मान है : सत्यपाल
मोतला कलां विद्यालय में तैनात शिक्षक सत्यपाल ने कहा कि यह पूरे शिक्षक समाज का सम्मान है। विभिन्न प्रकार की गतिविधियों एवं उपलब्धियों के आधार पर यह सम्मान दिया जाता है। उन्होंने बताया कि सम्मान पाकर वह खुश हैं। खुशी है कि इस बार हमें यह सम्मान मिलने जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देना और बच्चों को शिक्षा के साथ नई शैक्षणिक एवं सर्वांगीण विकासन्मुखी गतिविधियों से जोड़ना हमारा मकसद रहेगा। अभिभावकों से सद्व्यवहार और छात्रों में शिक्षा और समाज के प्रति जागरूकता पैदा करके उन्हें देश का जिम्मेदार नागरिक बनाना ही हमारा मकसद है।
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फोटो - 20 से 25
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