रेवाड़ी। गेहूं की फसल की कटाई करते श्रमिक। संवाद
कोसली। किसानों ने सरसों फसल की कटाई के बाद गेहूं की कटाई पर जोर दे दिया है। किसानों के खेतों में व्यस्त हो जाने से गांव की चौपाल में रौनक गायब हो गई है। वहीं, शहरों में भी चहल पहल कम ही देखने को मिल रही है। किसानों को यह चिंता सता रही है कि कहीं पिछले कुछ दिनों से मौसम का बगलता मिजाज पक कर तैयार गेहूं की फसल को तहस-नहस न कर दे। दरअसल, पिछले दिनों मौसम का मिजाज बदलने के बाद से किसान सहमा हुआ है। क्षेत्र के किसान राम मूर्ति, पूर्ण, नारायण धर्म सिंह आदि ने बताया कि फसल की बुवाई के बाद बढ़वार के लिए फसल को अनुकूल मौसम नहीं मिला। फरवरी में मौसम के करवट लेने के बाद हुई हल्की बारिश ने दम तोड़ रही फसल को जीवन दान दिया। इसके बाद किसानों ने नलकूपों के सहारे फसल को पकाया। अब मौसम के बार-बार बिगड़ रहे मिजाज से किसान को चिंता है कि कहीं तैयार फसल चौपट न हो जाए।
गलियारों में चौपाल से रौनक गायब
किसानों के खेतों में व्यस्त हो जाने से गांव के गलियारों में चौपाल से रौनक गायब हो गई है। वहीं, शहरों में भी विरानी सी दिखाई देती है। किसान पोह फटते ही सह परिवार खेतों में प्रस्थान कर रहे हैं। घरों में बुजूर्ग वर्ग, विद्यार्थी नजर आ रहे हैं। किसान व मजदूर जहां फसल कटाई में व्यस्त है वहीं उनके मासूम व छोटे बच्चे खेतों में तपती धूप पेड़ों के नीचे दिन बिता रहे हैं। कोसली क्षेत्र में ज्यादातर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश के मजदूर भूमिहीन लोग यहां हर वर्ष की भांति दिहाड़ी मजदूरी के लिए आने प्रारंभ हो गए।
परिवार का होता है पालन पोषण
बिहार से आए सरस्वती, कृष्ण कुमार व मोहनलाल ने बताया कि वह हर वर्ष इस इलाके में सरसों की कटाई के समय आते हैं व गेहूं की कटाई का काम खत्म होने के बाद ही अपने घरों के लिए प्रस्थान करते हैं। इससे उनका खर्च वर्ष भर का अनाज भंडारण हो जाता है और उनके परिवार का पालन पोषण आसान हो जाता है।