कोरोनाकाल में सभी क्षेत्रों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा है, लेकिन जब जब वेतन ही न मिले और ऊपर से सरकार भी शर्तें लगाना शुरू कर दे तो बेचैनी होना स्वाभाविक है। इन दिनों कुछ ऐसा ही निजी स्कूलों के शिक्षकों के साथ हो रहा है। दसवीं कक्षा के तक के शिक्षकों की बात करें तो अधिकतर निजी स्कूलों में 15-20 हजार रुपये का वेतन मिलता है। लेकिन कोरोनाकाल में पांच माह से यह वेतन भी अधिकतर शिक्षकों को नहीं मिल रहा है। ऐसे में सवाल है कि इस दौरान हजारों की संख्या में शिक्षकों को चूल्हा कैसे चल रहा होगा, किसी ने पूछने की जहमत नहीं उठाई। जब स्कूल खोलने की बारी आई तो स्कूल जाने से पहले कोरोना जांच रिपोर्ट जमा कराना अनिवार्य कर दिया गया। इतना नहीं नहीं आनन-फानन में निजी शिक्षकों की कोरोना जांच पर 1600 रुपये देने की शर्त भी लगा दी गई, जबकि सरकारी शिक्षकों के लिए यह निशुल्क रखा गया। ऐसे में अब जिला के निजी स्कूूल के शिक्षक राजस्थान में जाकर कोरोना जांच कराने को मजबूर है, क्योंकि राजस्थान में निशुल्क जांच हो रही है। पहले से आर्थिक तंगी का सामना कर रहे शिक्षकों में अब इस नई व्यवस्था को लेकर सरकार के खिलाफ रोष बढ़ता जा रहा है।
300 स्कूल के 30 हजार शिक्षकों सहित 50 हजार लोग प्रभावित: डॉ. सूर्यकमल
प्रयाग स्कूल के संचालक डॉ. सूर्यकमल ने कहा कि निजी स्कूलों के शिक्षकों से कोरोना जांच के लिए वसूली करना नाजायज है। इससे पहले भी सरकार की ओर से कैंप लगाकर निशुल्क सैंपल लिए जा रहे थे। उन्होंने बताया कि जिला में करीब 300 निजी स्कूलों के 30 हजार निजी शिक्षक और 20 हजार गैर शैक्षणिक स्टाफ इस आदेश से प्रभावित हो रहा है। स्कूल पहले से ही आर्थिक तंगी झेल रहे हैं।
निजी स्कूल शिक्षकों के सैंपल निशुल्क होने जरूरी: एसोसिएशन प्रधान
हरियाणा प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के जिला प्रधान रामपाल यादव ने कहा कि निजी शिक्षकों से जांच के लिए वसूली करना दोहरा रवैया है। ऐसो नहीं होना चाहिए, सरकार के पास शिकायत भेजी गई है। तब तक सभी शिक्षकों को टेस्ट नहीं कराने के लिए कहा गया है। सरकार को तुरंत इस फैसले को वापस लेकर लाखों की संख्या में निजी शिक्षकों को राहत देनी चाहिए।
सरकार के निर्देशों की पालना के बावजूद दोहरी नीति गलत: हेमंत सैनी
निजी स्कूल संचालक हेमंत सैनी ने कहा कि कोविड काल में निजी स्कूलों की ओर सरकार की ओर से जारी सभी हिदायतों का पालन किया गया है। शिक्षक पहले से ही आर्थिक तंगी झेल रहे हैं, अब अचानक इस तरह का फरमान गलत है। सरकार को इस फैसले को वापस लेना चाहिए। यदि यह निर्णय पहले से होता समझ में आता, लेकिन स्कूल खुलते ही इस तरह के आदेश गलत हैं।
सरकार की दोगली नीतियों का संगठन कर रहा है विरोध: राज्य प्रधान
हरियाणा प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रधान जवाहरलाल दूहन के कहा कि संगठन की ओर से इस तरह की दोगली नीतियों का विरोध किया जा रहा है। 21 सितंबर से पहले निशुल्क व्यवस्था थी, जैसे ही स्कूल खुलने की सूचना आई चार्ज निर्धारित कर दिये। सरकार को इस फैसले को तुरंत वापस लेना चाहिए। स्कूल शिक्षक पहले से ही आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं।