शहर में 7 अगस्त से लेकर 22 सितंबर के बीच सांड़ों की चपेट में आने से तीन लोगों की मौत के अलावा दर्जन भर से ज्यादा लोग घायल हुए, प्रशासन के खिलाफ विरोध बढ़ा तो नगर परिषद की ओर से 20 दिन तक करीब 400 गोवंश को पकड़कर धारूहेड़ा स्थित गौशाला भेजा गया, लेकिन मामला ठंडा होते ही पशुओं को पकड़ने के अभियान ने भी दम तोड़ दिया है। शहर के बाजारों, सर्कुलर रोड, बाईपास ही नहीं गोवंश का आतंक सेक्टर व कालोनियों की गलियों में ज्यादा बढ़ गया है। हालात ऐसे हैं कि घर से भी निकलने में डर लगने लगा है- 15-20 पशुओं का झुंड किधर से आ जाए, पता नहीं। रात के समय यह परेशानी ज्यादा बढ़ जाती है। सोमवार देर रात भी अंबेडकर चौक के पास एक गोवंश ऑटो के सामने आ गया, गनीमत यह रही कि ऑटो पलटने से बच गया और इसमें बैठे तीन लोगों की जिंदगी बच गई। जबकि गोवंश गंभीर रूप से घायल हो गया।
12 अगस्त को कायस्थवाड़ा चौक पर सांड़ों ने उतारा था मौत के घाट
शहर के कायस्थवाड़ा चौक पर 12 अगस्त को दोपहर के समय दो सांड़ों ने लड़ते हुए स्कूटी सवार फोटो स्टूडियो संचालक डोली को मौत के घाट उतार दिया था। सांड़ों ने डोली को इतनी बुरी तरह से कुचला था कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके बाद आईओसी चौक पर ऑटो के सामने सांड़ के आने से ऑटो पलट गया था, इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसके बाद गांव पातूहेड़ा से कंपनी में जाते समय एक कर्मचारी को सांड़ ने पटक-पटककर मौत के घाट उतार दिया था। ये तीनों मौत के एक माह के अंदर हुई। वहीं 6 अगस्त को शहर के बड़ा तालाब पर एक बच्ची पर गोवंश ने हमला कर दिया था, जिसमें बच्ची के दो दांत टूट गए थे। इन सभी घटनाओं को लेकर लोगों ने धरना-प्रदर्शन भी किए, समस्या ज्यों की त्यों बरकरार है।
जिले में 10 गोशाला बनाने का किया था दावा, एक भी पूरी नहीं
सड़कों पर घूम रहे हजारों की संख्या में गोवंश को पकड़कर गोशाला में रखने के लिए प्रशासन की ओर से धारूहेड़ा सहित जिले में कोसली व अन्य स्थानों पर 10 गोशालाएं बनाने का दावा किया गया था, लेकिन अभी तक धारूहेड़ा में गोशाला के नाम पर चहारदीवारी ही खड़ी हो पाई है। हालांकि जिम्मेदार हाईटैक गोशाला बनाने का दावा कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि धारूहेड़ा नपा के पास 55 करोड़ का बजट हैं, ऐसे में गोशाला आत्म निर्भर गोशाला बनाया जाएगा।
डीसी लगा चुके हैं नप अधिकारियों को फटकार
करीब 10 दिन पहले डीसी यशेंद्र सिंह की ओर से पशुओं को गोशालाओं में भेजने को लेकर समीक्षा बैठक की थी। इस दौरान डीसी ने कहा था कि जितने गोवंश गौशाला में भेजने की बात कही जा रही है, उससे कहीं ज्यादा सड़कों पर घूम रहे हैं। ऐसे में यदि इस बार कोई दुर्घटना आवारा पशुओं से हुई नप व नपा सचिव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। बावजूद इसके जमीनी हालात में कोई सुधार नहीं हो रहा है।
गोशाला में काम पूरा होते ही पकड़े जाएंगे पशु: ईओ
नगर परिषद ईओ विजयपाल यादव ने बताया कि धारूहेड़ा गौशाला में शेड व गाय व सांड़ को अलग रखने का काम चल रहा है। जैसे ही काम पूरा होगा दोबारा पशु पकड़ने का अभियान चलाया जाएगा।